प्रयागराज, 16 मार्च (अम)। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने कानपुर नगर के कल्याणपुर स्थित नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) के जूनियर ट्रांसलेटर की पदोन्नति की मांग खारिज कर दी। कहा कि नियमों के अनुसार आठ साल की सेवा के बाद ही इस पर विचार किया जा सकता है। यह आदेश अधिकरण के सदस्य (प्रशासनिक) मंजू पांडे और सदस्य (न्यायिक) रजनीश कुमार राय की खंडपीठ ने पंकज ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
पंकज ने याचिका में नौ जनवरी 2025 को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की ओर से पारित उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसमें उन्हें सहायक निदेशक (राजभाषा) पद पर पदोन्नति के लिए अयोग्य बताया गया था। उनका कहना था कि 12 अगस्त 2021 के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार पात्रता सेवा में तीन माह तक की छूट दी जा सकती है। इसलिए उन्हें एक जनवरी 2025 से पदोन्नति के लिए पात्र माना जाए और विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक कराई जाए।
मामले में केंद्र सरकार और संबंधित विभागों की ओर से दायर जवाब में कहा गया कि सहायक निदेशक (राजभाषा) पद पर पदोन्नति के लिए आठ वर्ष की नियमित सेवा अनिवार्य है। याची ने 21 मार्च 2017 को जूनियर ट्रांसलेटर के रूप में नियुक्ति पाई थी। वह मार्च 2025 में ही आठ साल की सेवा पूरी करता है। इसलिए 2020 की रिक्ति के समय वह पात्र नहीं था और पद को प्रतिनियुक्ति से भर दिया गया।
12 अगस्त 2021 के कार्यालय ज्ञापन के तहत तीन माह की सेवा छूट केवल 2019 से 2023 तक के रिक्ति वर्षों के लिए लागू थी और 2024 के बाद यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि नियमों के अनुसार याची मार्च 2025 में आठ साल की सेवा पूरी करेगा। पात्रता की महत्वपूर्ण तिथि एक जनवरी होने से पदोन्नति के लिए एक जनवरी 2026 से ही विचार किया जा सकता है। विभाग की ओर से जारी नौ जनवरी 2025 को पारित आदेश में कोई त्रुटि नहीं है।
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