नई दिल्ली 10 जून। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों में जमा धन पर मिलने वाले ब्याज को पारदर्शी बनाने के लिए एक मसौदा ढांचा पेश किया है। इस नए नियम के आने के बाद बैंक गुपचुप तरीके से ब्याज दरों में बदलाव नहीं कर पाएंगे। सभी बैंकों को हर दिन की शुरुआत से पहले अपनी वेबसाइट पर सभी जमा योजनाओं की ब्याज दरें घोषित करनी होंगी।
केंद्रीय बैंक ने मसौदा सुझावों के लिए जारी किया है। इनका उद्देश्य बैंकों को रुपये में मिले बड़े जमा की ब्याज दर तय करने की अधिक स्वतंत्रता देना और जमा ब्याज दरों के खुलासे में एकरूपता लाना है। हितधारक इस मसौदे पर 20 जून तक अपनी राय दे सकते हैं।
बैंक सिर्फ उसी ब्याज दर पर जमा स्वीकार करेंगे, जो उन्होंने वेबसाइट पर दिखाई है। इससे उपभोक्ताओं को ब्याज दरों की तुलना करने में आसानी होगी। इसके तहत बैंकों को तरलता कवरेज अनुपात मानदंडों के तहत आने वाली लागत के आधार पर एक ही जमा श्रेणी के ग्राहकों के लिए अलग ब्याज दरों की अनुमति मिल सकती है।
अगर किसी बैंक को अपना व्यापार बढ़ाने के लिए ज्यादा नगदी की जरूरत होगी तो वह बड़े जमाकर्ताओं को लुभाने के लिए सामान्य से अधिक ब्याज दर की पेशकश कर सकेगा। इसके विपरीत यदि किसी बैंक के पास पहले से ही पर्याप्त नगदी मौजूद है तो वह थोक जमा पर कम ब्याज दर भी दे सकता है। हालांकि, बैंकरों का कहना है कि इस कदम से जमा जुटाने पर कोई खास प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा।
ब्याज दरों में ट्रांसपरेंसी लाने पर जोर
आरबीआई के प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा ट्रांसपरेंसी से जुड़ा है. केंद्रीय बैंक चाहता है कि सभी बैंक अपनी एफडी और अन्य जमा योजनाओं की ब्याज दरों का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट पर पहले से प्रकाशित करें. यह जानकारी कारोबारी दिन शुरू होने से पहले उपलब्ध होनी चाहिए. इस कदम का फायदा यह होगा कि ग्राहक आसानी से अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना कर सकेंगे. इससे किसी विशेष ग्राहक को चुपचाप अलग दर देने या जानकारी छिपाने जैसी संभावनाएं कम हो जाएंगी.
साथ ही निवेशकों को यह समझने में आसानी होगी कि किस बैंक में उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से एफडी मार्केट अधिक प्रतिस्पर्धी और बेहतर रूप से काम कर सकेगा. इससे ग्राहकों को बड़ा फायदा होगा.

