कानपुर 17 मार्च। साइबर ठग ने खुद को मार्क जुकरबर्ग बताकर चकेरी की सेवानिवृत्त शिक्षिका एलिसन वीम्स से 1.57 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। शातिरों ने शिक्षिका से सोशल मीडिया पर संपर्क किया और शहर आकर स्कूल का व्यवसाय करने का झांसा दिया। 25 जनवरी 2025 से 20 फरवरी 2026 तक करीब 13 माह में उनसे अलग-अलग खातों में रकम जमा करा ली। शिक्षिका के रुपये वापस मांगने पर आरोपी बोले खाते में 2.23 करोड़ रुपये हो गए हैं। रुपये वापसी को लेकर टैक्स, वेरिफिकेशन और स्टांप ड्यूटी के नाम पर और रुपये जमा कराएं।
मामले की शुरुआत फेसबुक पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट से हुई। एक व्यक्ति ने खुद को मार्क जुकरबर्ग बताया और शिक्षिका से दोस्ती की। शुरुआती बातचीत सामान्य रही, लेकिन जल्द ही ठग ने निवेश के बड़े-बड़े प्रस्ताव रखने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि वे कानपुर में एक बड़ा स्कूल खोलने की योजना बना रहे हैं और इसमें निवेश करने पर बहुत अधिक मुनाफा मिलेगा। बात को और विश्वसनीय बनाने के लिए बाद में एक अन्य व्यक्ति ने संपर्क किया, जिसने खुद को एलन मस्क का सहयोगी या गायक जॉश टर्नर बताया।
शिक्षिका ने कई बार भेजे रुपये
शिक्षिका को लगा कि यह कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट है। उन्होंने पहले कुछ रकम ट्रांसफर की। जब उन्हें शक हुआ और पैसे वापस मांगने लगीं, तो ठगों ने नया जाल फैलाया। उन्होंने खुद को ‘मिरेकल गिवर्स’ और ‘लीड इंडिया’ जैसे फर्जी संगठनों के वकील अशोक सुरेश के रूप में पेश किया। दावा किया गया कि पैसे वापस दिलाने के लिए टैक्स, कन्वर्जन चार्ज, स्टांप ड्यूटी और अन्य कानूनी फीस जमा करनी होगी। आरोप है कि इस बहाने उन्होंने पीड़िता से बार-बार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे मंगवाए। कुल पांच अलग-अलग खातों में यह राशि भेजी गई।
साइबर क्राइम ने दर्ज किया मामला
जब शिक्षिका पूरी तरह लुट चुकी थीं, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। साइबर क्राइम सेल ने एनसीआरपी के माध्यम से मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। अब तक फ्रॉड से जुड़े खातों से लगभग 30 लाख 42 हजार रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि यह ठगी बहुत सुनियोजित थी। अपराधियों ने व्हाट्सएप, फोन कॉल्स और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर पीड़िता का भावनात्मक और आर्थिक शोषण किया।

