नई दिल्ली 26 मार्च। केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए संशोधित उड़ान योजना को बुधवार को मंजूरी दी। इसके तहत 100 नए हवाई अड्डों को विकसित कर 120 नए गंतव्यों से जोड़ा जाएगा। इससे चार करोड़ यात्रियों को लाभ होगा।
योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक के लिए लागू होगी, जिसके तहत अगले 10 वर्ष में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 28,840 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी गई है। यह हवाई अड्डे मौजूदा छोटे एयरस्ट्रिप को विकसित करके बनाए जाएंगे। इस काम पर करीब 12,159 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा छोटे हवाई अड्डों के संचालन और रखरखाव के लिए भी तीन साल तक वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिससे इनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहे।
200 आधुनिक हेलीपैड भी बनाए जाएंगे
संशोधित उड़ान योजना के माध्यम से दूरदराज और पहाड़ी इलाकों की हवाई संपर्क सुधारने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड बनाए जाएंगे। इसके लिए 3,661 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका मकसद पहाड़ी, पूर्वोत्तर, द्वीपीय और एस्पिरेशन रीजन्स में एयर कनेक्टिविटी में सुधार लाना है। एयरलाइन्स को सपोर्ट करने के लिए केंद्र अगले पांच साल तक 80 से 90 फीसदी वायबिलिटी गैप फंडिंग देगा। इसके लिए 10.043 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
केंद्र सरकार वार्षिक फास्टैग पास को दो श्रेणियों स्थानीय और राष्ट्रीय में बांटने की तैयारी कर रही है। स्थानीय श्रेणी का पास मौजूदा सालाना पास से 20 प्रतिशत सस्ता, जबकि राष्ट्रीय पास लगभग 10 प्रतिशत महंगा होगा।
वर्तमान में 3,075 रुपये के असीमित वार्षिक पास की व्यवस्था है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब ‘एक देश एक पास’ की बजाय टियर सिस्टम लागू किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार देश के 80 प्रतिशत वाहन केवल अपने पड़ोसी राज्यों या सीमित दायरे में ही सफर करते हैं। इसमें अधिकांश 100-200 किमी तक सफर करते हैं। इन यात्रियों के लिए लगभग तीन हजार रुपये वाले पास की कीमत में 15 से 20 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव है, जबकि लंबी दूरी तय करने वाले महज 20 प्रतिशत वाहनों के लिए नेशनल पास होगा।

