25 मई से 2 जून तक नौतपा को लेकर खूब बवाल मचा और फिर इसी बीच दो बार आंधी तूफान का अलर्ट हुआ। लेकिन यह जानकार बड़ा आश्चर्य हुआ कि ना नौतपा का असर दिखा ना किसी अलर्ट का प्रभाव। आश्चर्य इस बात का रहा कि आंधी हवाओं के साथ जो गमले सड़कों पर पलटते हैं वो भी नहीं गिरे। सड़कें भी साफ रही तो नौतपा का असर कहीं नजर नहीं आया क्योकि जितनी गर्मी तपिश हवा आम रुप से चलती है इसमें इतना भी दिखाई नहीं दिया। इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि नौतपा और अलर्ट ने लोगों को डराया बहुंत और कितनों को बाहर निकलने से गर्मी सताने लगी तो कितने लोगेां ने तूफान के डर से अपने खिड़की दरवाजे सुरक्षित किए। जो कार्यक्रम देशभर में होने थे उन पर प्रभाव पड़ा क्योंकि आंधी और बारिश को लोगों ने अलर्ट की शुरुआत मान लिया। कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि मौसम की जानकारी देना बचाव का आहवान करने का मौसम विभाग अच्छा काम कर रहा है लेकिन संभावनाओं के आधार पर नौतपा और अलर्ट जैसे अभियान अचानक रुप में नहीं भेजने चाहिए क्योंकि इससे जरुरी काम प्रभावित होते हैं। कोई कहे कि कितने ही लोग इस दौरान मर गए तो इससे ज्यादा तो बीमारी और दुर्घटनाओं में मरते हैँ। तो उन्हें अलर्ट का असर का प्रभाव नहीं कह सकते। मेरा मानना है कि मौसम विभाग और उससे जुड़े लोगों को ऐसे मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए और कहीं ऐसा होने वाला हो तो साथ ही जैसे ग्रहण के बारे में सूचित किया जाता है तो उसी की तरह अलर्ट के साथ यह भी बताना चाहिए कि नौतपा या आंधी तूफान बारिश का प्रभाव इन क्षेत्रों में दिखाई देगा। क्योंकि सामान्य समय में भी शहरों में भी एक साथ बारिश नहीं आती। आज की बात ले लें मोदीपुरम की शीलकुंज में सुबह सात बजे बारिश हुई लेकिन आधी किलोमीटर के क्षेत्र में बारिश नहीं हुई। जो इस बात का प्रमाण है कि नौतपा या अलर्ट का असर शायद पूरे देश में उसका असर नहीं होता होगा लेकिन इसके डर का काम पर पड़ने वाले असर को देखते हुए सूचनाएं दी जाएं तो वह सोने में सुहागा के समान है। इसे ध्यान में रखते हुए नौतपा और अलर्ट का महत्वहीन असर का संज्ञान सरकार को लेना चाहिए। क्योंकि कमजोर दिल के लोग अपने सारे काम छोड़कर घर में लग जाते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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