नई दिल्ली, 07 अप्रैल (जा)। गोयला खुर्द गांव में स्थित एक संरक्षित तालाब में अर्बन एक्सटेंशन रोड-दो (यूईआर-2) परियोजना के तहत फ्लाईओवर के पिलर बनाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। यह मामला एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेने के बाद दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने अर्बन एक्सटेंशन रोड-दो (यूईआर-दो ) परियोजना के तहत गोयला खुर्द गांव में स्थित संरक्षित तालाब के अंदर फ्लाईओवर के आठ पिलर का निर्माण किया। मामले की सुनवाई करते हुए एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रायल को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने पाया कि एनएचएआई ने जिस तालाब में फ्लाईओवर के लिए पिलर का निर्माण किया, वह दिल्ली वेटलैंड अथारिटी की सूची में शामिल एक संरक्षित जलाशय है। एनएचएआइ ने इस तालाब के अंदर फ्लाईओवर के आठ पिलर का निर्माण किया, जिससे लगभग 20.36 वर्ग मीटर क्षेत्र प्रभावित हुआ। एनजीटी ने इसे अतिक्रमण मानते हुए रिकार्ड पर लिया कि पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) प्राप्त करते समय तालाब के भीतर निर्माण की पूरी जानकारी नहीं दी गई। वेटलैंड नियम, 2017 के अनुसार जलाशय में निर्माण प्रतिबंधित है।
पर्यावरण कानूनों का सख्ती से पालन अनिवार्य है। एनजीटी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रायल को छह माह में इस मामले की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही पीठ ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और एनएचएआइ की संयुक्त टीम को मौके का निरीक्षण कर जलाशय को हुए नुकसान का आकलन करने व सुधारात्मक उपाय करने के भी निर्देश दिए। एनजीटी ने एनएचएआइ को छह माह में पुनर्स्थापन कार्य पूरा करने और डीपीसीसी द्वारा पर्यावरण क्षतिपूर्ति तय कर वसूली करने के संबंध में भी निर्देश दिया।
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