न्यू मेक्सिको, 26 मार्च। अमेरिका के न्यू मेक्सिको की एक अदालत ने मेटा को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया। कोर्ट ने कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर (लगभग 3100 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है।
आरोप है कि कंपनी ने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा के बारे में उपयोगकर्ताओं को गुमराह किया और बाल यौन शोषण को रोकने में विफल रही। अदालत ने पाया कि मेटा ने न्यू मेक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन किया है। अदालत ने कुल 75,000 उल्लंघनों के लिए प्रति उल्लंघन 5,000 डॉलर का जुर्माना तय किया। आरोप लगाया गया कि मेटा ने अपराधियों को कम उम्र के बच्चों तक पहुंचने और संपर्क साधने के लिए रास्ता दिया। इससे दुर्व्यवहार और मानव तस्करी की घटनाएं हुईं। कंपनी पर ‘इनफिनिटी स्क्रॉल’ और ‘ऑटो-प्ले वीडियो’ जैसे फीचर्स के जरिए बच्चों को प्लेटफॉर्म का आदी बनाने का आरोप लगा, जिससे अवसाद बढ़ा। मेटा ने इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, हम फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।
न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक है और यह पहली बार है जब किसी राज्य ने बच्चों की सेफ्टी के मुद्दों पर सफलतापूर्वक केस किया है. वहीं, मेटा के एक स्पोक्सपर्सन यानी प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी फैसले से सहमत नहीं है और अपील करने का इरादा रखती है. बता दें कि मेटा के मालिक मार्क जुकरबर्ग हैं.
दरअसल, यह फैसला करीब एक दिन की सोच-विचार के बाद आया. इस केस में छह हफ्ते तक ट्रायल चला. इस ट्रायल में राज्य ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा पर नाबालिगों को यौन शोषण, ऑनलाइन लालच और ह्यूमन ट्रैफिकिंग से बचाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था. अमेरिकी राज्य ने अधिक से अधिक $2.2 बिलियन यानी करीब 2,07,42,51,30,000 रुपए का हर्जाना मांगा था, लेकिन जूरी ने $375 मिलियन की कम रकम दी. यह केस सांता फे कोर्ट में यह केस चला. यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और बच्चों की सेफ्टी से जुड़े पहले मामलों में से एक है, जिसमें जूरी का पैसला आया है.
किसने ठोका था मेटा पर केस
यह केस लाने वाले न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने कहा, ‘जूरी का फैसला हर उस बच्चे और परिवार के लिए एक ऐतिहासिक जीत है, जिसने बच्चों की सेफ्टी से ज़्यादा मुनाफे को तरजीह देने के मेटा के पैसले की कीमत चुकाई है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मेटा के अधिकारियों को पता था कि उनके प्रोडक्ट बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्होंने अपने कर्मचारियों की चेतावनियों को नज़रअंदाज किया और जो उन्हें पता था, उसके बारे में जनता से झूठ बोला.’
क्या है पूरा केस
गौरतलब है कि जूरी ने एक ट्रायल के बाद अपना फैसला सुनाया. इसमें 40 गवाहों की गवाही सुनी गई. इसमें कर्मचारी जो व्हिसलब्लोअर बने थे, शामिल थे. फैसले से पहले सैकड़ों डॉक्यूमेंट्स, रिपोर्ट्स और ईमेल्स की समीक्षा की गई. दरअसल, टोरेज ने 2023 में मेटा और उसके CEO मार्क जकरबर्ग के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. इसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने में नाकाम रही.

