प्रयागराज, 11 फरवरी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना कारण बताए दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी को अवैध ठहराया है और तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ तथा न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा है कि अज्ञानता कानून के उल्लंघन के लिए वैध बहाना नहीं हो सकती। ऐसी गिरफ्तारी डीजीपी के जुलाई 2025 के सर्कुलर का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित में गिरफ्तारी का कारण बताना चाहिए। ऐसा न करना संविधान के अनुच्छेद 22 (1) का उल्लंघन है। डीजीपी को खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि वे सभी पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी करें और उसका पालन सुनिश्चित कराएं। खंडपीठ ने राज्य सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया कि मैनपुरी थानाध्यक्ष को पुलिस महानिदेशक जुलाई 2025 के उस परिपत्र की जानकारी नहीं थी, जिसमें गिरफ्तारी के नए ज्ञापन का उल्लेख है। कोर्ट ने श्अनूप कुमार श्और अभिषेक यादव की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए मैनपुरी के सीजेएम द्वारा 20 जनवरी 2026 को पारित रिमांड आदेश रद कर दिया। याचीगण के अधिवक्ता का कहना था कि गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए थे। एजीए के अनुपालन शपथ पत्र में वर्णित गिरफ्तारी मेमो और गिरफ्तारी के कारण, कानून के अनुसार नहीं हैं जैसा हाई कोर्ट ने उमंग रस्तोगी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और तीन अन्य में 22 जनवरी 22026 को पारित आदेश में कहा है।
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