विकास कार्यों को लेकर होने वाले दावों और अफसरों की बयानबाजी का असल सत्य बीते दिवस केंद्रीय जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को कार्यक्रम उपरांत छतरपुर रोड पर चरखारी विधायक ब्रजभूषण राजपूत द्वारा १०० ग्राम प्रधानों के साथ उनकेमार्ग में ५० कारें व बाइकें खड़ी कर रोक दिया गया। जिसे लेकर केंद्रीय मंत्री व अफसरों के साथ तीखी झड़प हुई लेकिन ब्रजभूषण इस बात पर अड़े रहे कि उनके साथ जो १०० ग्राम प्रधान है वो मुझसे पूछते हैं कि क्या हो रहा है इसलिए बात तो सुननी पड़ेंगी। मैं बातों से संतुष्ट होने वाला नहीं हूं। राजपूत ने कहा कि विधानसभा में मुददा उठा चुका हूं। पत्राचार भी किया लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कलक्ट्रेट में डीएम गजल भारद्वाज के साथ ही मंत्री के सामने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि जलशक्ति मिशन के तहत पाइप लाइन के लिए खोदी गई सड़कों के ना बनने पर नाराजगी जताई गई। इस पर काम पूरे करने के लिए २० दिन का आश्वासन हुआ। काम कितना औरसमय से होगा या नहीं यह तो समय पूरा होने पर पता चलेगा लेकिन केंद्रीय मंत्री और विधायक में जो सार्वजनिक रूप से हुआ उससे एक बात तो स्पष्ट हो रही है कि सभी विभागों के ज्यादातर अफसर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में सफल नहीं है और सुविधा व बजट मिलने के बाद भी काम पूरा करने की बजाय दावे व भाषण ज्यादा कर रहे हैं जिससे विपक्षी नेता और जनता के साथ भाजपा विधायक व नेता संतुष्ट नहीं है। मेरा मानना है कि सरकार को इस तरह के विवाद रोकने के लिए निष्क्रिय और भ्रष्टचार के आरोपी अफसरों को जनहित के कार्यों से हटाया जाए। उन्हें जिम्मेदार पदों पर तैनाती ना दी जाए क्योंकि ऐसे कागजी आंकड़ेबाजी करने वाले अधिकारी जहां भी बैठेंगे वहीं असंतोषा को बढ़ावा देने का काम करेंगे। विधायक ब्रजभूषण राजपूत का निर्णय जनता की समस्याओं से उच्च नेतृत्व को अवगत कराने का प्रयास कह सकते हैं। जिसे देखकर सभी को चौकस हो जाना चाहिए क्योंकि ऐसी दूसरी घटनाएं हुई तो २०२७ के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी के सामने परेशानी खड़ी होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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