लखनऊ 23 मार्च। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो-रक्षा व गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गो-सेवा भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है और इस क्षेत्र में योगदान देने वालों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक गोशाला में ‘भूसा बैंक’ स्थापित करने, स्थानीय किसानों से समन्वय कर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को गो-आश्रयों से जोड़ने के निर्देश दिए। शनिवार को गोसेवा आयोग के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के निराश्रित गौ-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने सभी गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और निगरानी को अनिवार्य बताते हुए सीएसआर फंड के उपयोग पर बल दिया। कहा कि तकनीक आधारित मानिटरिंग से पारदर्शिता और व्यवस्था दोनों मजबूत होंगी। उन्होंने गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों को दो-दो के समूह में मंडलवार भ्रमण कर निरीक्षण करने और इसकी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को देने के निर्देश दिए। विभागीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यालय स्तर से नियमित औचक निरीक्षण भी सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि गो-संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार है।
डीबीटी के माध्यम से समयबद्ध भुगतान, गोवंश की दैनिक गणना का रजिस्टर और जनसहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। प्रदेश में वर्तमान में 7527 गो-आश्रय स्थलों में 12.39 लाख से अधिक गोवंशी हैं। इनमें अस्थायी वृहद केंद्र, कान्हा गो- आश्रय और कांजी हाउस शामिल हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत लाखों गोवंशी लाभार्थियों को सौंपे गए हैं, जिनके सत्यापन के निर्देश दिए गए। प्रदेश में हजारों गो-आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं और कई जिलों में कमांड एवं कंट्रोल रूम भी स्थापित हो चुके हैं। गोचर भूमि के उपयोग, हरे चारे के विकास और गोबर गैस संयंत्रों के विस्तार पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों और एनजीओ द्वारा गोबर से पेंट, वर्मी कंपोस्ट व अन्य उत्पादों के निर्माण को आत्मनिर्भरता का सफल माडल बताया और इसके विस्तार के निर्देश दिए।

