नई दिल्ली, 28 फरवरी (अम)। भारत ने निजी खपत बढ़ाने की रफ्तार के मामले में अमेरिका, चीन और जर्मनी को पीछे छोड़ दिया है। उम्मीद है कि देश 2026 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बन जाएगा। डेलॉय इंडिया ने रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर गत दिवस जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में निजी खपत 2013 के एक लाख करोड़ डॉलर से दोगुना होकर 2024 में 2.1 लाख करोड़ डॉलर पहुंच जाएगी। ये आंकड़े बताते हैं कि देश में निजी खपत हर साल 7.2 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ रही है और वृद्धि की यह रफ्तार अमेरिका, चीन एवं जर्मनी से अधिक तेज है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कई कारक मौजूद हैं, जो निजी खपत में तेजी ला रहे हैं। इनमें अधिक प्रीमियम भुगतान और उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव शामिल हैं। बढ़ती समृद्धि के साथ उपभोक्ता कीमत की तुलना में गुणवत्ता, सुविधा और अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अगले साल तक तीसरे सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार बनने के साथ जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उठाने के लिए भी अच्छी स्थिति में है।
डिजिटल और वित्तीय समावेशन से कर्ज तक पहुंच अभूतपूर्व गति से बढ़ रही है। क्रेडिट कार्ड की पहुंच 2024 के 10.2 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 2030 तक 29.6 करोड़ हो जाएगी, जिससे उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होगी।
फिनटेक समाधान और यूपीआई जैसे डिजिटल भुगतान उपभोक्ताओं के ब्रांड के साथ जुड़ने के तरीके को नया रूप दे रहे हैं। ई-कॉमर्स को अपनाने और डिजिटल फर्स्ट उपभोग की नई लहर को बढ़ावा दे रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक तीन गुना होगी 10,000 डॉलर से अधिक कमाने वालों की संख्या हो जाएगी। ऐसे भारतीयों की संख्या 2024 के छह करोड़ से बढ़कर 2030 में 16.5 करोड़ पहुंच जाएगी। यह देश के मध्य वर्ग की महत्वपूर्ण वृद्धि और विवेकाधीन खर्च की ओर एक मौलिक बदलाव को दर्शाता है। कुल आबादी में 52 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले जनरेशन जेड और मिलेनियल्स इस बदलाव और प्रीमियम ब्रांड, टिकाऊ उत्पादों और व्यक्तिगत अनुभवों की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।
भारत की प्रति व्यक्ति आय 2030 तक बढ़कर 4,000 डॉलर से अधिक हो जाएगी। यह व्यवसायों के पास ग्राहकों की बदलती अपेक्षाओं को पूरा करने का एक अविश्वसनीय अवसर होगा। डेलॉय इंडिया के भागीदार आनंद रामनाथन ने कहा, भारत का उपभोक्ता परिदृश्य परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। विवेकाधीन खर्च में वृद्धि, डिजिटल कॉमर्स का विस्तार और कर्ज तक बढ़ती पहुंच ब्रांड से जुड़ाव के नियमों को फिर से परिभाषित कर रही है। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा, विवेकाधीन खर्च वृद्धि के नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जो बढ़ती आय, डिजिटल स्वीकार्यता और विकसित उपभोक्ता प्राथमिकताओं से प्रेरित है। भारत में संगठित खुदरा कारोबार 10 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है। बढ़ती खर्च योग्य आय और विकसित होती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के कारण 2030 तक इसके 230 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
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