प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में बीते दिनों शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान हेतु उनके बताए स्थान पर ना जाने देने के बाद उत्पन्न विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मैं मेले में तो रहूंगा लेकिन घाट पर नहीं जाउंगा। आज मेला प्राधिकरण द्वारा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस देकर कहा गया है कि वो २४ घंटे में साबित करें कि ज्योतिष पीठ के वो शंकराचार्य हैं। इस पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि वह भी मेला प्रशासन को नोटिस जारी करेंगे। यह तो रही मेला प्रशासन व स्वामी जी के बीच के विवाद की बात लेकिन एक खबर से पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद वह शंकराचार्य कैसे लगा रहे हैं यह विषय चर्चा का है। स्मरण रहे कि मौनी अमावस्या पर स् नान को लेकर मेला प्रशासन और शंकराचार्य में काफी विवाद हुआ था। तब भी उन्हें बिना स्नान के शिविर में लौटा दिया गया था। स्वामी जी के शिष्य आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने उन्हें मारा पीटा। स्वामी जी ने कई उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों पर भी आरोप लगाए हैं। उनके बारे में तो हम कुछ नहीं कह सकते लेकिन यह जो मामला सामने आ रहा है कि वह सिद्ध करें कि वह शंकराचार्य है महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार महामंडलेश्वर जैसे पदों को लेकर भी विवाद की चर्चाएं सुनाई देती रही है। अब यह जो मामला सामने आया है यह काफी महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि नागरिकों की धार्मिक आस्था और सनातन धर्म के प्रति बढ़ते विश्वास को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में सक्रिय साधु संतों और अन्य शंकराचार्यों सहित सभी को बीच में पड़कर इस मामले का समाधान खोजना चाहिए। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भी थोड़ा साधु संतों की परंपरा के अनुसार अपने व्यवहार में गरिमा लानी चाहिए। क्योंकि यह समय धार्मिक क्षेत्र में किसी विवाद को बढ़ावा देने का नहीं है क्योंकि एक तरफ पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित तमाम धर्म में आस्था रखने वाले और सनातन धर्म की प्रतिष्ठा को बढ़ाने में लगे लोगों की उस मुहिम को ठेस पहुंच सकती है जो दक्षिण के राज्यों में सनातन धर्म हिंदी को विवादों में घसीटने के प्रयास को रोकने का काम कर रहे हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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