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    Home»देश»तमिलनाडु में ‘न तब, न अब, आगे भी नहीं देंगे हिंदी को जगह’ : स्टालिन
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    तमिलनाडु में ‘न तब, न अब, आगे भी नहीं देंगे हिंदी को जगह’ : स्टालिन

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJanuary 26, 2026No Comments1 Views
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    चेन्नई, 26 जनवरी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने हिन्दी को लेकर फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हिन्दी के लिए तमिलनाडु में न पहले कोई जगह थी, न आज है और न ही भविष्य में कभी होगी। स्टालिन ने रविवार को ‘भाषा शहीद दिवस’ के अवसर पर कहा कि तमिलनाडु ने अपनी भाषा से हमेशा अपनी जान से भी ज्यादा प्यार किया है। राज्यवासियों ने एकजुट होकर हिन्दी थोपने के खिलाफ संघर्ष किया। स्टालिन ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें 1965 में भाषा के मुद्दे पर डीएमके के दिग्गजों सीएन अन्नादुरई और एम करुणानिधि के योगदान का जिक्र किया गया था। मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘मैं उन शहीदों को कृतज्ञतापूर्वक सम्मान देता हूं जिन्होंने तमिल के लिए अपनी जान दी। भाषा युद्ध में अब और कोई जान नहीं जाएगी। तमिल के लिए हमारा प्यार कभी नहीं मरेगा। हम हमेशा हिंदी थोपने का विरोध करेंगे। इससे पहले स्टालिन ने एक कार्यक्रम में ‘भाषा शहीद’ थलामुथु और नटरासन के स्मारक पर श्रद्धांजलि दी।
    मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के एक ताज़ा बयान ने तमिलनाडु में हिन्दी भाषा पर चल रही बहस को एक बार फिर हवा दे दी है। गत दिवस राज्य में सत्तारूढ़ डीएमके ने चेन्नई में ‘भाषा शहीद दिवस’ मनाया और इस मौके पर मुख्यमंत्री ने राज्य के उन भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी जान अतीत में हिन्दी विरोधी आंदोलन के दौरान गई थी।
    स्टालिन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि न तब, न अभी, ना ही कभी हिन्दी को यहां जगह मिलेगी।
    हिन्दी को लेकर केंद्र की एनडीए सरकार और राज्य की डीएमके सरकार के बीच लंबे समय से तनातनी बनी हुई है, हालांकि इसकी जड़ें अतीत में रही हैं।
    डीएमके अध्यक्ष स्टालिन कई बार आरोप लगा चुके हैं कि तमिलनाडु पर हिन्दी थोपने की कोशिश की जा रही है और वो इसका विरोध करना जारी रखेंगे। हालांकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कुछ महीने पहले कहा था कि, तमिलनाडु सरकार इस पर राजनीति कर रही है। उनका कहना था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय भाषाओं को महत्व देने वाली है और इसमें कहीं भी ये नहीं कहा गया है कि हिन्दी की ही पढ़ाई जानी चाहिए।
    एक्स पर स्टालिन ने लिखा कि भाषा शहीद दिवस, गौरवशाली श्रद्धांजलि, हिन्दी के लिए कोई जगह नहीं है, न तब थी, न अब है और ना ही कभी होगी।
    उन्होंने आगे लिखा कि वह राज्य जो अपनी भाषा से अपनी जीवनधारा जैसा प्यार करता है, उसने एकजुट होकर हिन्दी थोपे जाने के ख़िलाफ़ संघर्ष किया। हर बार जब हिन्दी थोपी गई, उसने उसी बहादुरी के साथ प्रतिरोध किया। उसने भारतीय उपमहाद्वीप में विविध भाषा-आधारित राष्ट्रों के अधिकारों और अस्मिता की रक्षा की। मैं उन शहीदों को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ जिन्होंने तमिल (भाषा) के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
    अब से भाषा संघर्ष में और कोई प्राण न खोए हमारी तमिल चेतना कभी न बुझे! हम हिन्दी थोपे जाने का हमेशा विरोध करेंगे।
    उन्होंने हिन्दी विरोधी आंदोलन के इतिहास से जुड़ा एक छोटा वीडियो भी साझा किया, जिसमें अतीत में हुए आंदोलनों की रिपोर्टिंग की झलकियां और उसे नेतृत्व देने वाले नेताओं और प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें दिखाई गई हैं। वीडियो में शहीदों के संदर्भ के साथ डीएमके के दिवंगत नेताओं सी एन अन्नादुरै और एम करुणानिधि के योगदान का भी जिक्र किया गया. यह आंदोलन 1965 में अपने चरम पर पहुंचा था। तमिलनाडु में भाषा शहीद उन लोगों के संदर्भ में कहा जाता है जिनकी हिन्दी विरोधी आंदोलन के दौरान जान गई।
    यह मामला तब फिर से उठा जब केंद्र ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया। तमिलनाडु सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को राज्य में लागू नहीं किया है। डीएमके का आरोप है कि केंद्र इसके मार्फ़त हिन्दी थोपने की कोशिश कर रहा है।
    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि तमिलनाडु सरकार इस पर राजनीति कर रही है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय भाषाओं को महत्व देने वाली है और इसमें कहीं भी ये नहीं कहा गया है कि हिन्दी ही पढ़ाई जानी चाहिए।

    "Neither then Desh In Tamil Nadu nor in the future will we give any place to Hindi": Stalin nor now Tamil Nadu Chief Minister MK Stalin tamil-nadu tazza khabar tazza khabar in hindi
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