अयोध्या, 02 फरवरी। अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा वापस ले लिया है। फैसले से पलटने वाले अफसर ने कहा कि मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है। फिलहाल मैं अपने दफ्तर में काम कर रहा हूं। उन्होंने 27 जनवरी को सीएम योगी का सपोर्ट करते हुए इस्तीफा दिया। राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह सरकारी सेवा से त्यागपत्र प्रकरण में यू-टर्न लेते हुए गत दिवस ड्यूटी पर लौट आए। 27 जनवरी को मीडिया के कैमरों के बीच सरकारी सेवा में वेतन को नमक बताते हुए भावुकता में पत्नी से मोबाइल पर रोते हुए अपने त्यागपत्र की जानकारी दी थी। उनके इस अप्रत्याशित कदम से अयोध्या से लेकर लखनऊ व दिल्ली तक मोबाइल की घंटिया घनघनाने लगीं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना विलंब राज्य कर कार्यालय पहुंच कर त्यागपत्र वापस लेने के लिए उनकी मान मनौव्वल की। राजी न होने पर उन्हें एक डिप्टी कलेक्टर व पुलिस बल के साथ लखनऊ स्थित उनके आवास पर भेजा गया।
31 जनवरी को वापस कार्य पर लौट आने से उनके त्यागपत्र को लेकर उठा बवंडर भी शांत हो गया। बताया जा रहा है कि त्यागपत्र के अगले दिन उनको लखनऊ स्थित राज्य कर मुख्यालय बुलाया गया था।
तभी से उनके त्यागपत्र वापस लेने की अटकलें राज्य कर विभाग में लगने लगी थीं। अपर आयुक्त ग्रेड-एक संतोष कुमार साहू ने बताया कि डिप्टी कमिश्नर ने तीन दिन बाद कार्यालय पहुंच कर विभागीय कार्य निपटाया है।
राज्य कर विभाग के यह वही डिप्टी कमिश्नर हैं जिन्होंने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के त्यागपत्र के बाद गणतंत्र दिवस के दूसरे दिन दोपहर में मीडिया को बुला कर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणी से आहत होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में त्यागपत्र देकर अयोध्या से लेकर लखनऊ व दिल्ली तक हलचल मचा दी थी।
डिप्टी कमिश्नर के त्यागपत्र के बाद भाई विश्वजीत सिंह ने उनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र को फर्जी बताते हुए इस्तीफा पर सवाल खड़ा कर दिया था। प्रशांत ने अपने ऊपर लगे आरोपों के जवाब में भाई विश्वजीत को मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़ा हुआ बताया। उस पर दर्ज आपराधिक मुकदमे के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सीएमओ मऊ से जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के क्रम में वह सीएमओ अयोध्या के सामने प्रस्तुत हो चुके हैं। लिखित रूप से मऊ के सीएमओ ने जारी प्रमाणपत्र को सही बताया है। कहा, भाई विश्वजीत सिंह जानबूझ कर उनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र को झूठा बताते हैं।
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