लखनऊ 12 दिसंबर। यूपी एसटीएफ ने पोर्टल के माध्यम से फर्जी जन्म और निवास प्रमाण-पत्र से आधार कार्ड तैयार करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है. आरोपी प्रमोद निषाद बीएसएसी पास है. अब तक वह करीब 19 हजार आधार कार्ड बना चुका है. वह नेपाल भागने की फिराक में था, लेकिन रजनवा नेपाल बॉर्डर से शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि एसटीएफ को सूचना मिली थी कि बहराइच-नेपाल सीमा पर फर्जी आधार कार्ड बनाने का बड़ा रैकेट सक्रिय है. इस पर साइबर टीम ने जब जांच शुरू की तो प्रमोद कुमार निषाद (28) पुत्र संत राम निषाद निवासी ग्राम सेमरी मलमला, थाना मुर्तिहा, जनपद बहराइच का नाम सामने आया. बाद में पता चला कि थाना मुर्तिहा में पहले से ही इस गिरोह के खिलाफ मुकदमा दर्ज है.
इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए सोनू सिंह, अखंड प्रताप सिंह, नफीस अली और राम निवास गुप्ता ने पूछताछ में बताया था, कि कूटरचित जन्म निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले पोर्टल की और आधार कार्ड बनाने की यूजर आईडी और पासवर्ड उन्हें प्रमोद निषाद ही देता था.
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया गिरफ्तार अभियुक्त प्रमोद कुमार निषाद ने पूछताछ में बताया कि उसने 2021 में जनसेवा केंद्र का लाइसेंस लिया था. एक साल पहले अक्टूबर 2022 के आसपास उसका संपर्क टेलीग्राम पर अकील सैफी नाम के व्यक्ति से हुआ.
प्रमोद ने पुलिस को बताया कि सैफी ने 35,000 रुपए लेकर एनी डेस्क के माध्यम से उसके सिस्टम पर फर्जी निवास/जन्म प्रमाण पत्र बनाने का पोर्टल और आधार कार्ड बनाने का पोर्टल डाउनलोड कर दिया. साथ ही आईडी और पासवर्ड सेव कर दिया.
प्रमोद ने बताया कि वह इस पोर्टल पर फर्जी आधार बनाने वाले व्यक्ति का नाम, पता और जन्मतिथि डालता था और 1-2 मिनट में ही डिजिटली कूटरचित जन्म/निवास प्रमाण पत्र का PDF तैयार हो जाता था. इन्हीं का प्रयोग करके वह 0-18 वर्ष के लोगों के नए आधार कार्ड बनाता था.
प्रमोद ने बताया कि उसने अपने जानने वाले दर्जनों लोगों के सिस्टम पर भी मो. सैफी के माध्यम से यह पोर्टल डाउनलोड करवाए हैं. वह प्रत्येक आईडी का 45,000 रुपए लेता था, जिसमें से 35,000 रुपए सैफी को देता था.
गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रमोद कुमार छिपकर रह रहा था और गिरफ्तारी के समय वह नेपाल भागने की फिराक में था.
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एसटीएफ अब अभियुक्त के बैंक खातों और वालेट की जांच कर रही है. साथ ही, गिरोह के अन्य सदस्यों और जन्म/निवास प्रमाण-पत्र पोर्टल डेवलप करने वाले डेवलपर की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं.

