Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • शिल्पा शिंदे ने कबूला फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट केस करना
    • जगदीश मंडप और बहादुर मोटर्स के पास लाल निशान लगने के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया लटकी
    • दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे शुरू होने से सिवाया टोल को रोज 10 लाख का घाटा
    • मेडा ने 50 होटलों को जारी किए नोटिस
    • सोना रिफाइनरी राजेश एक्सपोर्ट्स में 15 लाख करोड़ रूपये की हेराफेरी
    • यूपी के मेरठ कानपुर समेत 20 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
    • नहीं दिखाई दिया नौतपा और अलर्ट का असर, मौसम विभाग विस्तार से दिया करे जानकारी
    • आओ मिलकर वृक्ष लगाएं धरती पर हरियाली लाएं
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»सोना रिफाइनरी राजेश एक्सपोर्ट्स में 15 लाख करोड़ रूपये की हेराफेरी
    देश

    सोना रिफाइनरी राजेश एक्सपोर्ट्स में 15 लाख करोड़ रूपये की हेराफेरी

    adminBy adminJune 5, 2026No Comments4 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली 05 जून। राजेश एक्सपोर्ट्स…यह नाम भारत की एक अहम गोल्ड कंपनी का है, जो 3 जून देर शाम से सुर्खियों में है। सोने के गहने और गोल्ड रिफाइनिंग के बिजनेस में सक्रिय इस कंपनी के ऊपर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। सेबी ने कहा है कि कंपनी ने 15 लाख करोड़ के रेवेन्यू के साथ मिसमैनेजमेंट किया है। सरल शब्दों में कहें तो 1500 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। इस मामले में SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और चेयरमैन व एमडी, राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम एकतरफा आदेश पारित किया है। इसके बाद कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आ गई।

    उधर, मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन व एमडी, राजेश मेहता ने कहा, “यह एक अंतरिम आदेश है और इसमें लिखी कोई भी बात सच नहीं है।

    बेंगलुरु स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स, ग्लोबल गोल्ड इंडस्ट्री में बड़ी पहचान रखती है। यह भारतीय कंपनी दुनिया भर में आभूषणों का निर्यात करती है और इसका वार्षिक राजस्व इतना अधिक रहा है कि यह अक्सर अपने सेक्टर में भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में शुमार रही।

    कंपनी पर क्या आरोप लगे?
    3 जून को जारी एक अंतरिम आदेश में, सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता को शेयर बाजार में कारोबार करने से रोक दिया। सेबी ने 5 वित्तीय वर्षों में फैले भारी वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया, जिसमें 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू की जानकारी छिपाई गई थी। हालांकि जांच अभी जारी है और SEBI के निष्कर्ष अंतिम नहीं हैं।

    कब हुई शिकायत?
    राजेश एक्सपोर्ट पर लगे गंभीर आरोप की जांच 11 मार्च, 2024 को शुरू हुई, जब SEBI को एक शेयरधारक की ओर से शिकायत मिली। इसमें असामान्य रूप से बड़ी व्यापार प्राप्तियों पर सवाल उठाए गए थे, जो कथित तौर पर दो साल से अधिक समय से बकाया थीं। इस तरह की लंबी अवधि की लेनदारियां अक्सर चिंता का विषय होती हैं क्योंकि वे भुगतान प्राप्त करने में कठिनाइयों या संभावित लेखांकन अनियमितताओं का संकेत दे सकती हैं।

    शेयरधारक की ओर से मिली इस शिकायत के बाद SEBI ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। अक्टूबर 2024 में, नियामक ने एक जांच प्राधिकरण नियुक्त किया। बाद में उसने कंपनी के खातों की जांच करने और समूह द्वारा किए गए वित्तीय खुलासों को सत्यापित करने के लिए फोरेंसिक ऑडिटर बीडीओ को नियुक्त किया। यह जांच हाल के वर्षों में हुई किसी कंपनी के खिलाफ अब तक की बड़ी जांच थी।

    कैसे हुई 15 लाख करोड़ की हेराफेर?
    सेबी के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2025 के बीच, राजेश एक्सपोर्ट्स की लगभग सभी कंसोलिडेटेड इनकम, विदेशी सहायक कंपनियों से प्राप्त हुई। कुल रिपोर्ट की गई बिक्री में इनका योगदान 97 प्रतिशत से 99 प्रतिशत के बीच रहा।

    इसमें सबसे महत्वपूर्ण सहायक कंपनी वालकैम्बी एसए थी, जो स्विट्जरलैंड स्थित एक गोल्ड रिफाइनरी यूनिट है जिसे राजेश एक्सपोर्ट्स ने कई साल पहले अधिग्रहित किया था। वालकैम्बी,गोल्ड रिफाइनरी को व्यापक रूप से समूह के अंतरराष्ट्रीय कारोबार की अहम रीढ़ माना जाता है।

    जब लेखा परीक्षकों ने वैलकैम्बी और अन्य सहायक कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की, तो उन्हें एक बड़ा अंतर मिला। इसके बाद सेबी ने आरोप लगाया कि कंपनी की ओर से कंसोलिडेटे बेसिस पर रिपोर्ट किया गया रेवेन्यू, सहायक कंपनियों के रिकॉर्ड से सत्यापित किए जाने वाले वास्तविक राजस्व से कहीं ज्यादा था। इसके परिणामस्वरूप, पांच वर्षों में कुल मिलाकर 15.15 लाख करोड़ रुपये का अंतर सामने आया।

    जांच में कंपनी ने किया सहयोग
    राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ जांच के दौरान सेबी के जांचकर्ताओं को रिकॉर्ड की चेक करते समय कथित तौर पर काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। SEBI ने कहा कि कंपनी जांचकर्ताओं द्वारा मांगे गए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रही। आरोप है कि फोरेंसिक ऑडिटर को ग्राहकों के पूरे रिकॉर्ड, विक्रेताओं के विवरण और महत्वपूर्ण सहायक कंपनियों के वित्तीय विवरण प्राप्त नहीं हुए। नियामक ने जांच के कुछ चरणों के दौरान असंगत प्रस्तुतियाँ और सहयोग की कमी की ओर भी इशारा किया।

    15 लाख करोड़ के अलावा और भी गड़बड़ी
    राजेश एक्सपोर्ट के खिलाफ सिर्फ रेवेन्यू संबंधी आरोप ही नहीं है बल्कि एक और परेशान करने वाली बात है। मार्केट रेगुलेटर ने अफ्रीका में स्थित सोने की माइनिंग प्रॉपर्टीज में कथित तौर पर किए गए 1,035 करोड़ रुपये के निवेश पर भी सवाल उठाए हैं।

    इसके अलावा, एसईबीआई के आदेश में कंपनी के फंड के लेन-देन को लेकर भी चिंता जताई गई है। नियामक ने आरोप लगाया कि कंपनी का पैसा प्रमोटर राजेश मेहता से जुड़े खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडिंग गतिविधियों के लिए किया गया।

    कंपनी के पैसों से शेयर ट्रेडिंग
    इसके अलावा, SEBI के आदेश में कंपनी के फंड के लेन-देन को लेकर भी चिंता जताई गई है। रेगुलेटर ने आरोप लगाया कि कंपनी का पैसा प्रमोटर राजेश मेहता से जुड़े खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडिंग गतिविधियों के लिए किया गया। जांचकर्ताओं ने राजेश मेहता के निजी खातों में आए 7.4 करोड़ रुपये के लेन-देन की ओर इशारा किया। बाद में उस धनराशि का एक हिस्सा कंपनी को लौटा दिया गया।

    मुश्किल में फंसा केनरा बैंक का कर्ज
    राजेश एक्सपोर्ट्स पर कर्जदाताओं का दबाव भी बना हुआ है। कर्ज़ चुकाने में चूक के बाद केनरा बैंक ने कंपनी में अपने लोन को संकटग्रस्त परिसंपत्ति (स्ट्रेस्ड एसेट) के रूप में वर्गीकृत किया है। बैंक पर बकाया राशि लगभग 509 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके परिणामस्वरूप, बैंक ने नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से इस संकटग्रस्त परिसंपत्ति को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    कंपनी को लेकर सामने आई गड़बड़ी का असर सिर्फ प्रमोटर्स और नियामकों तक ही सीमित नहीं है। क्योंकि, इस कंपनी के साथ लाखों आम निवेशक अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। दरअसल, राजेश एक्सपोर्ट में सबसे बड़ा स्टैकहोल्डर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) है, जिसकी राजेश एक्सपोर्ट्स में लगभग 10.8% हिस्सेदारी है।

    Rajesh Exports Revenue Scam SEBI tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    शिल्पा शिंदे ने कबूला फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट केस करना

    June 5, 2026

    जगदीश मंडप और बहादुर मोटर्स के पास लाल निशान लगने के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया लटकी

    June 5, 2026

    दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे शुरू होने से सिवाया टोल को रोज 10 लाख का घाटा

    June 5, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.