लखनऊ 27 मार्च। सीबीएसई द्वारा आयोजित जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट (जूनियर क्लर्क) भर्ती परीक्षा में हुई सेंधमारी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। गिरोह ने अभ्यर्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र झांसी और ललितपुर सीएमओ दफ्तर से बनवाए थे। इसमें झांसी सिविल अस्पताल के एक कर्मचारी की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। इसके अलावा भी कई लोग रडार पर हैं। एसटीएफ सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है। जल्द और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
एसटीएफ की टीम ने भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों को दिव्यांग दिखाकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने वाले गिरोह का राजफाश किया था। इसमें बीसीए पास सरगना मनीष मिश्रा के दो साथी आकाश अग्रवाल व सौरभ सोनी के साथ तीन अभ्यर्थी राजकिशोर, राम मिलन, अभिषेक यादव व तीन सॉल्वर नीरज झां, सत्यम कुमार और दीपक कुमार समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया था।
राजकिशोर का 40 फीसदी लो विजन दिव्यांगता प्रमाण पत्र ललितपुर सीएमओ दफ्तार से 19 अगस्त 2023 को बना था। अभ्यर्थी राम मिलन ने 40 फीसदी शारीरिक अक्षमता का प्रमाण पत्र सीएमओ झांसी के दफ्तर से बनवाया था। इसकी प्रमाणपत्र आईडी UP ID NO – UP 1590919950004 है। इसी तरह से अभ्यर्थी अभिषेक यादव लो विजन का प्रमाणपत्र बनवाकर परीक्षा में शामिल हुआ। 24 मार्च की सुबह की पाली में आरोपी सत्यम ने भी नाबार्ड में चपरासी पद के लिए झांसी के निशांत सोनी की जगह परीक्षा दी थी।
40-40 हजार में बनवाए प्रमाणपत्र
गिरोह पिछले सात-आठ वर्षों से ये फर्जीवाड़ा कर रहा है। इसमें मनीष मुख्य सरगना तो उसके साथी आकाश और सौरभ सोनी की भी बड़ी भूमिका है।
आकाश का सीधा कनेक्शन झांसी सिविल अस्पताल के कर्मी मोंटी यादव उर्फ शिवा यादव
है उसकी मदद से वह दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाता था। इसके लिए वह मोटी को 40 हजार रुपये प्रति प्रमाणपत्र देता था मोंटी की तरह ही तीन से चार और संदिग्ध लोगों के नाम सामने आए हैं जिनका मुख्य कार्य दिव्यांग प्रमाणपत्र उपलब्ध करवाना रहता था।
चलने फिरने असमर्थ… लेकिन दी दरोगा की परीक्षा
एसटीएफ के इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र राय की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, राम मिलन खुद को शारीरिक अक्षम दिखाकर परीक्षा में शामिल हुआ। जांच में सामने आया कि 14 मार्च को हुई दरोगा भर्ती परीक्षा भी उसने दी थी। इसलिए पुलिस अब इसकी रिपोर्ट पुलिस भर्ती बोर्ड को भी भेजेगी। दरोगा भर्ती परीक्षा में भी वह अयोग्य साबित किया जा जा सकता है।
सरकारी कर्मचारियों की फंसेगी नौकरी
गिरफ्तार सॉल्वर नीरज झा ने बीटेक कंप्यूटर साइंस से किया है। वर्तमान में वह दिल्ली में पीडब्ल्यूडी विभाग में मल्टी टास्किंग टास्क के तहत कार्यरत है। वहीं. आकाश अग्रवाल पीडब्ल्यूडी झांसी में बतौर क्लर्क काम कर रहा है। एसटीएफ मामले की रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजेगी, जिसके आधार पर इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जाएगी।

