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    Home»देश»इंजीनियर ने लगाया ट्रस्टी डा0 अनिल मिश्रा पर कमीशन लेने का आरोप
    देश

    इंजीनियर ने लगाया ट्रस्टी डा0 अनिल मिश्रा पर कमीशन लेने का आरोप

    adminBy adminJune 20, 2026No Comments5 Views
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    अयोध्या 20 जून। श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण की एसआइटी जांच के बीच शुक्रवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इंजीनियर रहे प्रयागराज के दीनानाथ वर्मा ने मीडिया में सामने आकर ट्रस्टी डा.अनिल कुमार मिश्र पर चालीस प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सब कुछ जानते हुए भी महासचिव चंपतराय अनजान बने रहे और जमकर लूटखसोट होती रही। जब उन्होंने कमीशनखोरी का विरोध किया, तो उन्हें महासचिव ने नकदी की गणना से जोड़ दिया।

    विरोध करने पर धमकियां दी जाने लगीं, जिससे आहत होकर उन्होंने अयोध्या छोड़ दी। दीनानाथ वर्मा ने बताया कि उन्हें महासचिव चंपतराय ने दिल्ली बुलाया था। मंदिर माडल निर्माण के लिए वह कोलकाता भेजे गए थे। आरोप लगाया कि निर्माण सामग्री कम मंगाई जाती थी, जबकि बिल अधिक मात्रा का लगाया जाता था।

    जब उन्होंने इस बारे में ठेकेदारों से सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि ट्रस्टी डा. अनिल कुमार मिश्र को कमीशन देना पड़ता है। दीनानाथ वर्मा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सेवानिवृत इंजीनियर रहे हैं। विहिप से जुड़ाव के कारण इन्हें मंदिर निर्माण कार्य से जोड़ा गया था। उनका यह भी आरोप है कि निर्माण के दौरान एल्युमिनियम का कार्य डाक्टर अनिल मिश्र ने अपने परिचित व्यक्ति रवि गुप्ता को दिलवाया। रवि ने जब अधिक बिल लगाना शुरू किया, तो उन्होंने विरोध किया।

    उसने भी कमीशन की बात कही थी। जब यह बात मेरे फोन में रिकार्ड हो गई, तो मैंने चंपतराय को यह बताया। वह सुनकर व्यथित हुए, परंतु चुप रहे। इसी बीच एक दिन विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेशचंद्र आए। उनसे मैंने सारी बात बताई। इसके बाद चंपतराय ने भारतीय स्टेट बैंक को पत्र लिखकर यह बताया कि अब ट्रस्ट की ओर से दीनानाथ वर्मा चढ़ावे की गणना का कार्य देखेंगे। नकदी का बंडल बैंक में जमाकर मैं रसीद लेने लगा। हमारी निगरानी सबको अखरने लगी।

    मंदिर में दर्शन के लिए जाने पर मुझे रामशंकर यादव टिन्नू की अनुमति लेनी पड़ती थी। वह मेरा मोबाइल रखवा लेता था। इन्हीं कारणों से परेशान और आहत होकर जब प्रयागराज वापस आ गया तो डाक्टर अनिल मिश्र के लोगों की ओर से धमकियां दी जाने लगीं कि वापस यहां न आना। मैं वापस नहीं गया, मेरा सामान भी वहीं रखा है। आरोपों पर चंपत राय और अनिल मिश्र से संपर्क की कोशिश की गई पर उनका फोन पिक नहीं हुआ।

    एसआइटी ने फिर ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र को बुलाया, दर्ज किया बयान
    विशेष जांच दल (एसआइटी) ने सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ और आभूषणों के मिलान व सत्यापन में खामियों के साथ ही वित्तीय पारदर्शिता में लापरवाही पाई है। दानपात्रों से नकदी एकत्रित करने के दौरान केवल नाम का ही पर्यवेक्षण किया जाता था। नकदी को गिनने वाले ट्रस्ट कर्मियों की गोपनीय कक्ष से निकलते समय जांच ही नहीं होती थी। सूत्रों के अनुसार ऐसा किसके कहने पर किया जाता था, इसका जवाब ट्रस्ट के पदाधिकारी नहीं दे पा रहे हैं।

    एसआइटी भी अब इस निष्कर्ष पर पहुंच रही कि इन्हीं लापरवाहियों का लाभ लेकर चढ़ावे में गबन किया जाता रहा। सूत्रों ने बताया कि रिकार्ड में भी कमियां पाई गई हैं, जिससे मिलान के दौरान इनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है। राज्य सरकार की ओर से गठित एसआइटी में शामिल लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आइजी किरण एस. व विशेष सचिव वित्त विभाग नीलरतन कुमार ने लगातार पांचवें दिन शुक्रवार को भी सुबह दस बजे परिसर में पहुंच कर पूछताछ की।

    ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र सुबह 11 बजे ही पहुंच गए थे। उनसे रामशंकर यादव टिन्नू के बयानों की तस्दीक करने के साथ नकदी की गणना से जुड़े अन्य बिंदुओं पर लगभग तीन घंटे तक जानकारी ली गई। पूछताछ के लिए टिन्नू यादव, मनीष यादव, केडी तिवारी व सुभाष श्रीवास्तव सहित अन्य संदिग्ध कर्मियों को भी बुलाया गया था।

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