उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री लखनऊ के मेयर रहे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य डॉ दिनेश शर्मा द्वारा कनाडा और ब्रिटेन का हवाला देकर मृत्यु उपरांत कर्मचारियों को अपने माता पिता की आत्मा की शांति और धार्मिक कार्यो के निस्तारण हेतु १३ दिन का सवैतनिक शोक अवकाश देने की मांग उठाई है। देश में अपनी बात कहने का अधिकार सबको है फिर डॅॉ दिनेश शर्मा तो बड़े जनप्रतिनिधि है इसलिए उन्होंने जो कहा वो भी गलत नहीं है। मगर क्या अपने देश में इस तरह के अवकाश घोषित किया जाना उचित होगा इस बारे में भी सोचना होगा। डॉक्टर दिनेश शर्मा का कहना है कि सनातन धर्म को मानने वाले अपने माता पिता के शोक की अवधि में यह व्यवस्था ना होने के चलते वह कार्यालय जाने को मजबूर होते है। वह वेतन के बारे में सोचें या माता पिता के बारे में इसलिए वह स्वतंत्र रूप से धार्मिक रीति रिवाजों को पूरा करने और दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले कार्योँ के लिए कम से कम १० दिन की छुटटी दी जानी चाहिए। डॉ दिनेश शर्मा जी देश में मजदूरों, किसानों और व्यापारियों के भी मां बाप होते हैं और उन्हें भी इतना ही दुख होता है जितना किसी सरकारी कर्मचारी को। इसलिए मैं आपकी बात का तो विरोध नहीं करता लेकिन आप सनातन धर्म ही नहीं हर धर्म को मानने वाले के लिए १० या १३ दिन के अवकाश की मांग करे। बस इतना कीजिए कि असंगठित क्षेत्र का व्यक्ति या व्यापारी की १३ दिन की आमदनी का हिसाब जोड़कर सरकार से उतना भुगतान आम आदमी को कराने की मांग कीजिए। आप उपमुख्यमंत्री और मेयर रह चुके हैं। आपको समाज के हर व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए सिर्फ सरकारी कर्मचारी के लिए नहीं। डॉ दिनेश शर्मा जी आपसे आग्रह है कि कुछ दिन साधारण व्यक्ति की तरह किसी अनजान दफ्तर में जाकर काम का तरीका देखिए और इतने ही दिन व्यापारियों व अन्य व्यक्तियों के बीच जाकर रहिए तो आपको पता चलेगा कि आदमी १६ घंटे काम कर रहा है और सुविधा भी ज्यादा नहीं है। सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी हमारे समाज का हिस्सा है। उन्हें सुविधा मिलती है तो हमें खुशी होती है मगर सरकारें सबको एक समान सुविधा उपलब्ध कराने की बात करती है तो हमेशा सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए ही क्यों आम आदमी पर भी काम का बोझ उतना है। सर्वे कराया जाए तो पता चलेगा कि जितनी संख्या में जनता वोट करती है उतने वोट शायद इनके द्वारा नहीं दिए जाते हैं। इसलिए मैं आपकी बात का तो विरोध नहीं करता लेकिन यह चाहता हूं कि समाज के हर व्यक्ति को एक समान सुविधा मिले। नौकरीपेशा तो तनख्वाह पाता रहे और अन्य पीड़ित रहे तो संतुलन बनाना आसान नहीं है। पीएम मोदी व सीएम योगी सभी को एक समान समझते हैं तो फिर आपके द्वारा की गई यह मांग सही है या गलत वो आप जाने लेकिन यह सबके लिए लागू हो जिससे हर कोई अपने माता पिता का संस्कार बिना खर्चे आने की बात सोचकर कर सके।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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