आए दिन होटल पान की दुकानों चौपालों पर कई लोग इकटठा होते हैं तो सत्ताधारी दल के लोग अपनी बात कहते हेँ और विपक्षी अपनी। लेकिन समाज में सरकार के कार्य की समीक्षा हो रही है और महसूस किया जा रहा है कि सरकार को सफलता नहीं मिल रही है। पीएम मोदी रिश्वतखोरी और लापरवाही खत्म करेन के प्रयास कर रहे हैं लेकिन यह बढ़ती जा रही है। चुनावों में इतना बहुमत नहीं देता है कि वह सरकार बना सके। ऐसा आखिर क्यों होता है। हम असफलता भी गिनाते हैं और चुनाव भी जीताते हैं और मोदी मैजिकों नागरिकों पर अपना असर छोड़ता है जिससे उम्मीदवार वोट प्राप्त करते हैं। दिल्ली व कई प्रदेशों में पहले से मेट्रों का संचालन होता है लेकिन दिल्ली मुंबई में ऐसी गाड़ियों का सफर करने को मिला। मुंबई में इसकी सवारी के लिए आपाधापी मचती है। शहर में कुछ माह पूर्व मेट्रो और नमो भारत का संचालन शुरु हुआ। उदघाटन के दौरान पीएम मोदी ने इसे काफी सुविधाजनक बताया था। बीते दिवस हमें भी मोदीपुरम से मेरठ साउथ स्टेशन तक सफर करने का मौका मिला तो यह देंखकर दंग रह गए कि यह गाड़ियां सुविधाजनक हैं। मोदीपुरम से मेरठ साउथ स्टेशन तक लगभग ११ स्टेशन है। मोदीपुरम से मेरठ साउथ स्टेशन तक आधा घंटा भी नहीं लगा और नमो भारत ४५ मिनट में दिल्ली पहुंच जाती है। सफर महंगा भी नहीं है। मोदीपुरम से चार लोगों के चार सौ रुपये आने जाने में लगे और सभी लोग आसानी से ट्रेन तक पहुंच जाते हैं। स्टेशन पर दिव्यांगों के लिए अलग से व्यवस्थाएं हैं। सफाई सिर चढ़कर बोलती है। खाद्य सामग्री के नाम पर लूट नहीं हो रही। सिनेमा में जो चाय ७० रुपये में मिलती है मेट्रो स्टेशन पर २० रुपये की चाय मिलती है। अन्य खाद्य सामग्री भी महंगी नहीं है क्योंकि पैसे ज्यादा मांगते तो देते हुए दुख होता है। सुरक्षा की अच्छी व्यवस्था थी और हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे थे। सफाई इतनी अच्छी थी कि शुद्ध हवा की कमी महसूस नहीं होती। पार्किंग के लिए ज्यादा भुगतान नहीं करना पड़ता। यह सभी बाते देखकर लगा कि कमियां होने के बाद भी लोग भाजपा को वोट क्यों देते हैं और मोदी मैजिक क्यों कहा जाता है। यह योजनाएं भले ही पूर्व सरकारों ने बनाई हो लेकिन लागू मोदी सरकार ने किया है। इसलिए ऐसी सुविधाएं वोट डालने समय मतदाताओं के सामने घूमती है और वह भाजपा को वोट देता होगा। मैंने कभी भाजपा को वोट नहीं दी लेकिन मेट्रों की सवारी से जो छवि बनी उससे लगा कि सत्ताधारी दल को वोट देने में नुकसान नहीं है। मेट्रों में जाते आते पूरे शहर का नजारा दिख रहा था क्योंकि वाहनों से चलने पर समस्याएं होती हैं और प्रदूषण भी झेलना पड़ता है। मेट्रो और नमो भारत मोदी सरकार की उपलब्धि है क्योंकि विमान जैसा सुख आदमी इन गाड़ियों में भुगत लेता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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