जोधपुर, 19 फरवरी। एक बड़ी एडमिनिस्ट्रेटिव कार्रवाई में राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने जोधपुर में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का सरप्राइज़ इंस्पेक्शन किया और पाया कि सुबह कोर्ट के समय डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज समेत आठ ज्यूडिशियल ऑफिसर्स डायस से गैरहाज़िर थे। इंस्पेक्शन के दौरान, कई कोर्टरूम में काम नहीं हो रहा था, क्योंकि तय कोर्ट प्रोसिडिंग के बावजूद पीठासीन ऑफिसर्स बेंच पर मौजूद नहीं थे। गैरहाज़िर लोगों में जोधपुर के डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज भी शामिल थे।
मुख्य न्यायाधीश ने गत दिवस उच्च न्यायालय के विरासत भवन परिसर और आसपास के अधीनस्थ अदालतों में निरीक्षण किया। इसके कुछ ही समय बाद उच्च न्यायालय के महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए एक आदेश जारी किया और निर्देश दिया कि अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से प्रतीक्षारत पदस्थापना आदेश के तहत रखा जाए। हालांकि, इसमें विस्तृत कारण नहीं बताए गए।
सूत्रों ने संकेत दिया कि कुछ न्यायिक अधिकारी अदालत के कामकाज की अवधि के दौरान अपने अपने कक्ष में पाए गए थे जबकि सभी न्यायाधीशों के लिए अलग अदालती समय और चौंबर का समय निर्धारित है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब जोधपुर के झालमंड स्थित उच्च न्यायालय परिसर को ईमेल के माध्यम से बम की धमकी मिली। एहतियात के तौर पर पूरे अदालत परिसर को खाली करा दिया गया और अदालती कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
एक नोटिस जारी किया गया जिसमें कहा गया कि सुनवाई दोपहर तक शुरू हो जाएगी। सुरक्षा जांच के बीच, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शर्मा ने न्यायालय परिसर का दौरा किया तथा जिला, महानगर और अन्य अधीनस्थ अदालतों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, कई अदालत कक्ष खाली पाए गए और कई न्यायिक अधिकारी अपने निर्धारित स्थान पर नहीं मिले। अनुशासन और समयपालन में हुई इस चूक को गंभीरता से लेते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश दिए।
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