गाजीपुर 13 अप्रैल। गाजीपुर के क्यामपुर छावनी गांव के ग्रामीणों ने वह कर दिखाया, जो दशकों तक शासन- प्रशासन नहीं कर सका। बिना किसी सरकारी सहायता के गांव वालों ने एक करोड़ रुपये का चंदा जुटाया और श्रमदान से मगई नदी पर करीब 105 फीट लंबा पक्का पुल तैयार कर दिया। रविवार को हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शेखर सिंह यादव ने इसका उद्घाटन किया और इस पर आवागमन शुरू हो गया। इस मौके पर न्यायमूर्ति ने कहा कि जो काम जनप्रतिनिधियों और शासन- प्रशासन को करना चाहिए था, उसे जनता को खुद करना पड़ा। यह पुल जनता के लिए बना है और इसे कोई छू भी नहीं सकता। यह पुल जैसा है, वैसा ही रहेगा। जरूरत पड़ी तो इसे और बेहतर बनाया जाएगा।
मगई नदी पर पुल बनाने की मांग गांव वालों की तरफ से कई बार उठी, विधानसभा में भी मुद्दा पहुंचा, लेकिन समाधान नहीं निकला। नतीजा यह कि 50 से अधिक गांवों के करीब 70 हजार लोगों को स्कूल, अस्पताल और बाजार जाने के लिए लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय करना पड़ता था। कई बार नाव हादसे भी हुए। पुल के निर्माण की कहानी जून 2022 में शुरू हुई, जब ग्राम प्रधान शशि कला उपाध्याय ने तटबंध निर्माण की पहल की। हालांकि, प्रशासनिक अड़चनों के कारण काम रुक गया। इसके बाद जनवरी 2024 में सेना के इंजीनियर कैप्टन रविंद्र यादव सेवानिवृत होकर गांव लौटे। उन्होंने नदी पर पुल नहीं होने के कारण गांव वालों को परेशान होते देख एक दिन स्कूल जा रही एक बच्ची लकड़ी के बने अस्थायी पुल से नदी में गिर गई। उस दिन कैप्टन रविंद्र ने पक्का पुल बनवाने का संकल्प लिया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मुलाकातों का दौर शुरू हुआ। महीनों के प्रयास के बाद भी कोई ठोस पहल नहीं हुई तो उन्होंने स्वयं सरकारी इंजीनियर से पुल का नक्शा तैयार कराया और 10 लाख रुपये का प्रारंभिक सहयोग दिया। इसके बाद गांव-गांव से सहयोग की ऐसी लहर उठी कि किसी ने 100 रुपये दिए तो किसी ने सीमेंट, बालू और सरिये का इंतजाम किया। जिनके पास कुछ नहीं था, उन्होंने श्रमदान किया। करीब 26 माह की लगातार मेहनत के बाद आम लोगों के विश्वास और एकजुटता का प्रतीक यह पुल बनकर खड़ा हो गया।

