बागपत, 23 फरवरी। डीएम अस्मिता लाल के प्रयास से नवाचार की प्रेरणादायक एवं सामाजिक संदेश देने वाली तस्वीर सामने आई है। गांव पुरा के ऐतिहासिक परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं के छूटे जूते- चप्पलों की रिसाइक्लिंग कराकर मैट तैयार कर स्कूल को दिए। इन मैट पर बच्चे बैठकर न केवल भविष्य संवार रहे हैं, बल्कि उनमें नवाचार प्रति सकारात्मक सोच पनप रही है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण का सपना भी साकार हुआ है।
डीएम ने कुछ दिन पहले महाशिवरात्रि मेले की व्यवस्था बनाने के लिए भगवान परशुरामेश्वर महादेव मंदिर पुरा का दौरा किया था, तब उन्हें वहां कुछ जूते-चप्पल पड़े दिखे। पूछने पर मंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि काफी संख्या में यहां श्रद्धालु भगवान आशुतोष का जलाभिषेक को आते रहते हैं कई बार भीड़ ज्यादा होने के कारण श्रद्धालुओं के जूते-चप्पल यहां छूट जाते हैं। यह सुनकर डीएम के दिमाग में आइडिया आया कि क्यों न जीरो वेस्ट के माडल का सपना साकार करें? डीएम ने महाशिवरात्रि मेले से कई दिन पहले मंदिर के बाहर नगर पालिका के सफाई कर्मियों को तैनात कर सफाई के साथ छूट गए जूते-चप्पलों को एकत्र करने का निर्देश दिया। मेला संपन्न होने पर ढाई हजार से ज्यादा जूते-चप्पल एकत्र किए गए थे। इसके बाद डीएम ने इनोवेशन से जुड़ी गाजियाबाद की सरफराज साक्षी इनोवेशन संस्था संचालित कर रहे सरफराज तथा साक्षी से बात। डीएम ने उन्हें मंदिर में छूटे जूते-चप्पलों की पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रिसाइक्लिंग कराकर मैट तैयार कराने का जिम्मा सौंपा। उन्होंने डीएम के आइडिया को अंजाम तक पहुंचाने को सोनीपत के बहालगढ़ की एक कंपनी से संपर्क कर उन्हें 1,800 जोड़ी जूते चप्पल देकर मैट तैयार कराए। इनसे 250 मैट तैयार हुए हैं। प्रत्येक मैट की लंबाई व चौड़ाई दो फीट है। डीएम ने ये मैट बागपत शहर में जिला पंचायत के पुराने डाक बंगले में संचालित प्राथमिक स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए दिए। शनिवार को डीएम बागपत तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस के बाद इस स्कूल में पहुंचीं। उन्होंने स्वयं बच्चों के साथ इसी मैट पर बैठकर मिड डे मील में बना भोजन किया। डीएम के अभिनव के प्रयोग की पहल से बच्चों को ठंड और गंदगी से बचकर आरामदायक मैट पर बैठने की सुविधा मिली है। साथ ही पर्यावरण के प्रति सकारात्मक संदेश भी है कि रबर के जूते-चप्पलों को प्रोसेस कर रंगीन व टिकाऊ मैट बनाकर बच्चों को देकर सामाजिक सरोकार निभा सकते हैं।
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