जनहित में सरकार कोई भी निर्णय लेने से नहीं चूक रही है लेकिन शासनादेशों और निर्देशों का पालन कारण कोई भी रहा हो नहीं हो पाता। मैं किसी भी विभाग या उसके अधिकारी पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा हूं लेकिन जो सामने नजर आ रहा है और जिसे लेकर जनता में चर्चा चल रही है उसके बारे में बात करना अनिवार्य है इसलिए यह कहने में कोई हर्ज महसूस नहीं कर रहा हूं कि चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने में संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी पूरी तौर पर असफल है। पिछले एक दशक से चाइनीज मांझे से होने वाले आम आदमी को नुकसान की चर्चा हुई है तब से इसे लेकर प्रतिबंध लगाए गए हैं और आदेश भी खूब हो रहे हैं लेकिन इसकी बिक्री बढ़ती ही जा रही है। क्योंकि पुलिस पर अन्य बहुत काम है। इसलिए उससे यह उम्मीद किया जाना संभव नहीं है कि वो इतने काम एक साथ कर सकती है आखिर पुलिसवाले भी इंसान है कोई हातिमताई नहीं। मेरा मानना है कि जिस प्रकार चाइनीज मांझे से लोग घायल हो रहे है बताते हैं कि कुछ लोगों की इसके कारण कुछ लोगों की जान भी गई है। मेरा केंद्र व यूपी के इसका प्रचलन रोकने से संबंध अधिकारियों से आग्रह है कि देशवासियों को इससे बचाने हेतु इसकी बिक्री रोकने के लिए किसी ऐसे विभाग को जिम्मेदारी दी जाए जिसके अधिकारी कर्मचारी सरकारी आदेशों का पालन करने में अग्रणी रहे हो। अगर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री जी यह काम पुलिस से ही कराना है तो इसके लिए अलग से इकाई बनाकर अधिकारी व कर्मचारी नियुक्त हो जो इस मांझे की बिक्री रोक सके वरना तो सब जानते हैं कि किसी भी शहर से लेकर गांव तक इसकी बिक्री कहां हो रही है। जब बच्चे इसे खरीदकर ला सकते हैं तो ऐसा नहीं है कि पुलिसवालों को पता ना हो । इससे कोई ना कोई खेल तो हो ही रहा है। क्योंकि यह तो विश्वास से कहा जा सकता है कि अपराधियों को पकड़ने के दावे करने वाले पुलिस अधिकारियों को अगर अपने क्षेत्र में चाइनीज मांझे की बिक्री का पता नहीं है तो उनकी कार्यप्रणाली के बारे में भगवान ही जान सकता है। फिलहाल मेरा समाजहित में हर व्यक्ति से आग्रह है कि चाइनीज मांझे की बिक्री हर हाल में रोकी जानी चाहिए। क्येांकि अब यह समस्या बेलगाम होती जा रही है। ना तो चाइनीज मांझा बेचने वाले रूक रहे हैं ना उस पर प्रतिबंध लगाने वाले अपना काम कर रहे हैं। आर्थिक मंदी के इस युग में जो खर्चे की मार इस चाइनीज मांझे के चलते पड़ रही है वो कठिनाई होती जा रही है जिससे उसे मुक्ति मिलनी ही चाहिए और यह उसका अधिकार भी है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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