केंद्र व प्रदेश सरकार नागरिकों को आवास, रोजगार के लिए आए दिन अपनी निर्माण नीति और नियमों में छूट देकर यह प्रयास कर रही है कि आम आदमी बिना किसी विवाद व परेशानी के ईमानदारी के साथ इन छूट के साथ निर्माण कार्य करे। मगर जो देखने में आ रहा है जितना सरकार छूट दे रही है उतना ही गलत तरीके से निर्माण करने की प्रवृति बढ़ती जा रही है। आम आदमी के बारे में यह कह सकते हैं कि उसे कोई तनख्वाह या लाभ नहीं मिलता तो वह कुछ गलत करने की सोचता है। मगर सरकारी अधिकारी जो मोटा वेतन और सुविधाएं ले रहे है उनके द्वारा नियमों की अनदेखी और सरकारी नीतियों का उल्लंघन कर अपनी इच्छाओं की पूर्ति बैंक बैलेंस बढ़ाने के लिए जो गलत काम कर व करा रहे हैं उससे शासन की योजनाओं को जमकर पलीता लगाया जा रहा है। ऐसे लोगों की कार्यप्रणाली के चलते जाम की समस्या बढ़ती ही जा रही है। आखिर यह कैसे रुकेगी इस बारे में जिम्मेदारों को अब जल्दी सोचना होगा।
अभी कुछ सुविधाएं और रियायत दी है जिनके तहत लोग अपना व्यापार और मकान बना सकें। आश्चर्य है कि संबंधित विभागों के लोग जो योजनाएं अभी लागू नहीं हुई है उनका लाभ अभी से उपलब्ध करा रहे है। इतना तो ठीक है लेकिन जिस प्रकार से निर्माण नीति का उल्लंघन अफसर करा रहे हैं उसे देखकर आश्चर्य होता है।
जागरुक पाठक और नागरिक किसी सड़क से गुजरते समय कई निर्माणों के बाहर मानचित्र पास लिखा देखते होंगे। क्या पास है यह किसी को नहीं पता और ना कोई बताना चाहता है। हर निर्माण के आगे मानचित्र पास का नक्शा लगाने के निर्देश के बावजूद वह दिखाई नहीं देता। कागजों में अवैध निर्माण सील है लेकिन मौके पर कॉम्पलैक्स चल रहे हैं और कहीं पर सील लगी होने के बाद अंदर कार्य चल रहा होता है। जब कोई इसकी शिकायत सीएम पोर्टल पर करता है तो अवेध निर्माण रोकने के लिए जिम्मेदार मानचित्र पास बताकर मामले को रफा दफा करने की कोशिश करते हैं और बड़े अधिकारी एसी कमरों से निकलकर यह देखना नहीं चाहते हैँ कि जेई या मेट की रिपोर्ट सही है या नहीं। अपने शहर में ९५ प्रतिशत निर्माण सरकारी नियमों का उल्लंघन कर बनाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है जितनी जमीन है मानचित्र पास कराने तक ४० प्रतिशत सेटबैक कराने और चार फीट सड़कों से हटाकर बनाने का नियम है लेकिन नियमों का उल्लंघन कर निर्माध धड़ल्ले से हो रहे हैं और मेडा अधिकारी उन्हें बचाने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री जी मेडा और आवास विकास के अफसरों को निर्देश कि वो यह बताएं कि मानचित्र से निर्माण सही हो रहा है या नहीं और दोषियों पर कार्रवाई शुरू करें वरना नागरिकों की यह बात सही है कि सरकारी जमीन घेरे जाने से पूर्व मेडा के अफसरों की संपत्ति की जानकारी कर और उनके कार्यकाल में कितने अवैध निर्माण हुए की जांच कराकर इनसे वसूली हो। मंडलायुक्त रहते हुए डॉ प्रभात कुमार ने एक इंजीनियर को जेल भेजा था वही नीति सरकारी नियमों का पालन कराने के लिए बनानी चाहिए। वीसी और सचिव को एक माह में क्षेत्रों का दौरा कर नियमों का पालन होते देखने के निर्देश दिए जाएं और शिकायत वाले निर्माणों का दौरा सचिव पद के बराबर व्यक्ति को करना चाहिए तभी सरकार को राजस्व मिल सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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