प्रयागराज 19 जनवरी। माघ मेले के दौरान प्रयागराज में पुलिस और एक संत के अनुयायियों के बीच हुई झड़प अब बड़ा मामला बनती नजर आ रही है. इस पूरे प्रकरण में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. प्रशासन ने साफ कहा है कि बिना अनुमति परंपरा के खिलाफ आचरण किया गया और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई होगी.
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुबह करीब 9 बजे अपने करीब 200 अनुयायियों के साथ उस क्षेत्र में पहुंचे, जिसे सुरक्षा कारणों से एक दिन पहले ही बंद कर दिया गया था. उनके अनुयायियों ने बैरियर तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई. इस पूरी घटना के सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं.
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम नोज पर जाने की जिद कर रहे थे, जबकि उस समय वहां भारी भीड़ थी. सुबह कोहरे के कारण संगम क्षेत्र में 9 से 10 बजे के बीच सबसे ज्यादा भीड़ रहती है. पुलिस ने समझाने की कोशिश की कि 200 लोगों और एक रथ के साथ आगे बढ़ने से भगदड़ हो सकती है, लेकिन वे नहीं माने. आरोप है कि उनके समर्थकों ने छोटे बच्चों को आगे कर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की और करीब तीन घंटे तक वापसी का रास्ता भी रोक दिया गया, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हुई.
इस पूरे मामले से नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस प्रशासन ससम्मान प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा ।शंकराचार्य ने प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए मीडिया को अपने शिविर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए आमंत्रित किया है. इस घटनाक्रम के बाद माघ मेले की व्यवस्थाओं और प्रशासन की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
वहीं, प्रयागराज के DM मनीष कुमार वर्मा ने कहा- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना इजाजत पालकी पर आए थे। उस समय संगम पर बहुत ज्यादा भीड़ थी। उनके समर्थकों ने बैरियर तोड़े, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की। हम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।

