ग्वालियर 14 मार्च। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित जीवाजी यूनिवर्सिटी प्रशासन की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे शिक्षा जगत को हैरान कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने साल 2026 के लिए सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों की जो ‘सीनियरिटी लिस्ट’ जारी की है, उसमें 5 से 7 साल पहले मर चुके और 14 सेवानिवृत्त प्रोफेसरों के नाम शामिल हैं। इस खुलासे के बाद यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यूनिवर्सिटी के कुलसचिव द्वारा जारी इस सूची में दो ऐसे नाम हैं, जिनका निधन सालों पहले हो चुका है। लापरवाही का आलम यह है कि सूची तैयार करने से पहले डेटा का मिलान तक नहीं किया गया।
प्रो. शशि जादौन: सोशियोलॉजी की प्रोफेसर, गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, दतिया। इनका निधन 23 अप्रैल 2021 को हो चुका है।
डॉ. अशोक कुमार सिंह: एसोसिएट प्रोफेसर, फिलॉस्फी, MLB कॉलेज, ग्वालियर। इनका निधन 19 मार्च 2019 को हुआ था।
हैरानी की बात केवल मृत प्रोफेसरों तक सीमित नहीं है। इस सूची में 14 ऐसे प्रोफेसरों के नाम भी धड़ल्ले से शामिल कर दिए गए हैं, जो अपनी सेवा पूरी कर रिटायर हो चुके हैं। यूनिवर्सिटी में सीनियरिटी लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी विकास एवं स्थापना शाखा की होती है, जिसने बिना किसी जांच-पड़ताल के यह फाइल आगे बढ़ा दी।
यूनिवर्सिटी की सीनियरिटी लिस्ट केवल कागजी दस्तावेज नहीं होती। इसी सूची के आधार पर प्रोफेसरों को बोर्ड ऑफ स्टडीज (BOS) का चेयरमैन, डीन और एक्सपर्ट पैनल में शामिल किया जाता है। मृत और रिटायर्ड लोगों के नाम शामिल होने से पूरी चयन प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है। मामला तब खुला जब प्रशासन ने अंतिम मुहर लगाने के लिए जानकारी का मिलान शुरू किया।

