लखनऊ, 02 जून (ता)। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में एक्स-रे टेक्निशनों की तबादला सूची जारी होते ही सवाल खड़े होने लगे हैं। इस सूची में एक ही नाम दो जगह दर्ज है। इससे फर्जी नियुक्तियों से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्ष 2008 और 2016 में एक ही नाम पर दो-दो लोगों को नियुक्ति पत्र बांटे गए थे। इस मामले की अब भी जांच चल रही है। इस बीच तबादला सूची में भी एक ही नाम दो जगह जारी हो गया। ऐसे में सवाल पूछा जा रहा है कि क्या यह भी फर्जी नियुक्ति से जुड़ा मामला है या फिर सूची टाइप करते समय केवल टाइपिंग मिस्टेक। हालांकि, तबादला सूची जारी करने वाले महानिदेशक डॉ. पवन कुमार इस मामले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से गत दिवस 38 एक्स-रे टेक्निशनों का तबादला किया गया है। इसकी सूची जारी होते ही विवाद शुरू हो गया। सूची में छठे नंबर और 32वें नंबर पर एक ही नाम है। मानव सम्पदा कोड और तैनाती स्थल तक हूबहू एक जैसा ही है। इसे महकमे के पुराने भर्ती घोटाले से जोड़कर देखा जाने लगा। सोशल मीडिया पर तबादला सूची वायरल हो गई। सवाल पूछा जाने लगा कि महज 38 टेक्निशनों की सूची जारी करने वाले अफसरों को एक ही नाम दो जगह क्यों नहीं दिखा? इस बीच विवाद शुरू होने पर महानिदेशक ने चुप्पी साध ली। हालांकि, इसके साथ ही मामले की विभागीय जांच भी शुरू हो गई।
मेडिकल कॉलेजों में तब्दील हुए अस्पतालों के कर्मचारी, डॉक्टर और टेक्निशनों में से किसी को छह महीने बाद तो किसी को एक साल बाद तैनाती मिली है। मेडिकल कॉलेजों से आने के बाद इन सभी के आवेदन पेंडिंग थे। हालाकि, तबादला सूची जारी होने के अंतिम दिन 31 मई को इन सभी कर्मचारी और डॉक्टरों को यूपी के अलग-अलग अस्पतालों में तैनाती दे दी गई। आरोप है कि शासन के अधिकारियों की लेटलतीफी के चलते तैनाती होने में देरी हुई।
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