नई दिल्ली, 06 फरवरी। दिल्ली बम धमाके के बाद चर्चाओं में आई फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को अब दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से दर्ज कराए गए धोखाधड़ी के मामले में की गई है। केंद्रीय जांच एजेंसियों के बाद अब दिल्ली पुलिस भी अपने केस में गिरफ्तार कर अल-फलाह के चेयरमैन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यूजीसी की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने दो केस दर्ज की थीं। इनमें चेयरमैन सिद्दीकी पर फर्जीवाड़े का आरोप था। जानकारी के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने सिद्दीकी को चार दिन की रिमांड पर लिया है। सूत्रों के मुताबिक सिद्दीकी से पूछताछ के दौरान फंडिंग व फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पता लगाया जाएगा। पुलिस उन लोगों की जांच करेगी, जो फर्जीवाड़े के इस पूरे नेटवर्क में सिद्दीकी के साथ शामिल थे। यूजीसी की ओर से दर्ज केस के अनुसार, फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी की वैध मान्यता 2018 में समाप्त हो चुकी थी।
यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) की शिकायतों के आधार पर की गई है। पुलिस ने सिद्दीकी के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। गिरफ्तारी के बाद सिद्दीकी को साकेत कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए उसे चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उसके खिलाफ मनी लान्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दाखिल की है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की है।
ईडी ने 16 जनवरी को अल फलाह चौरिटेबल ट्रस्ट और सिद्दीकी के खिलाफ प्रिवेंशन आफ मनी लान्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत चार्जशीट दायर की थी। एजेंसी के अनुसार, जांच दिल्ली पुलिस की एफआइआर के आधार पर शुरू की गई। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (एनएएसी) से मान्यता होने का गलत दावा किया था, जबकि उसकी मान्यता समाप्त हो चुकी थी।
जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर फर्जी या भ्रामक जानकारी के जरिए दाखिले लिए और मोटी फीस वसूली। ईडी का कहना है कि इस तरह इकट्ठा किया गया पैसा अवैध कमाई की श्रेणी में आता है। एजेंसी ने कुछ संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच भी किया है।
तलाशी के दौरान कई जगहों से नकदी, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए। ईडी ने दावा किया है कि कुछ फंड्स को सिद्दीकी के परिवार से जुड़ी कंपनियों और संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया। साथ ही, पैसों के लेन-देन को छिपाने के लिए अलग-अलग एंटिटीज के जरिए ‘लेयरिंग’ की गई। यूनिवर्सिटी के बड़े वित्तीय फैसलों में सिद्दीकी की सीधी भूमिका थी और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है। मामले की जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम एक अन्य गंभीर मामले में भी सामने आया है। पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए आतंकी हमले की जांच के दौरान यूनिवर्सिटी और अल फलाह चौरिटेबल ट्रस्ट के बीच कुछ संदिग्ध कड़ियां सामने आई थीं। विस्फोटक से भरी कार के ड्राइवर की पहचान डीएनए जांच से यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. उमर उन नबी के रूप में हुई थी।
इसके अलावा यूनिवर्सिटी के कुछ अन्य स्टाफ सदस्यों को भी आतंकी संगठनों से संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि इन मामलों की जांच अलग से चल रही है। फिलहाल, क्राइम ब्रांच और ईडी दोनों एजेंसियां मिलकर पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि वित्तीय अनियमितताओं और अन्य आरोपों की सच्चाई सामने लाई जा सके।
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