देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए पिछले कई दशक से अलग अलग तरीकों से हो रहे आंदोलनों और कई केंदीय मंत्रियों व नेताओं द्वारा इसका समर्थन किए जाने के बावजूद आज तक जनसंख्या नियंत्रण के लिए कोई कानून नहीं बन पाया है।
इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस नेता व पूर्व पीएम स्व इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने एक बच्चे का नारा दिया था और उनकी ज्यादतियों के कारण लोगों ने इसे अपनाया भी। उनके निधन के बाद एक बच्चा ही अच्छा का स्लोगन सरकार ने आगे बढ़ाया लेकिन यह सिर्फ एक कथन ही बनकर रह गया।
पिछले लगभग एक दशक में कई हिंदू और भाजपा नेता व संत महात्मा घर में बच्चों की संख्या को लेकर अलग अलग बयान देते रहे हैं। कुछ का कहना था कि पांच बच्चे होने चाहिए तो कोई एक दर्जन की बात कर रहे हैं। लेकिन यह सिर्फ बातों तक ही सीमित था क्योंकि इसे ना जनसमर्थन मिल रहा था और ना इस पर कोई चर्चा हो रही थी।
लेकिन आज एक खबर पढ़ने को मिली जिसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान कि देश और समाज के लिए तीन बच्चे पैदा करें अपने आप में महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में गांवों से लेकर महानगरों तक संघ की विचारधारा के लोग मौजूद हैं और ज्यादातर मोहन भागवत के कथन को ब्रहम वाक्य मानकर चलते हैं। ऐसे में लगता है कि अब खासकर बहुसंख्यकों के घर में बच्चों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है। मेरा मानना है कि दुनिया के कई देशों में जो चल रहा है उसमें हमें आधुनिक अस्त्र शस्त्र व साधनों को मजबूत करने के साथ ही जनसंख्या में बढ़ोत्तरी वक्त की सबसे बड़ी मांग है। भले ही मोहन भागवत ने तीन बच्चों की बात परिवार में संतुलन के दृष्टिकोण से कही हो मगर वृंदावन के रुकमणि विहार में जीवनदीप आश्रम के लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कई देश जन्मदर को बढ़ाने के उपाय कर रहे हैं। जनसंख्या नीति पर फिर से विचार होना चाहिए। यह सोचकर कि ५० साल बाद देश को कितने लोगों की जरुरत होगी। तभी कोई कानून जनसंख्या नीति लाने का बनाया जाए। मुझे लगता है कि मोहन भागवत का कथन अटल सत्य है। एक जमाने में जनसंख्या कम करने के लिए चीन में जो नीति अपनाई गई थी उसमें भी अब छूट दी गई है क्योंकि युवाओं की संख्या कम और बुजुर्गो की बढ़ती संख्या ने उन्हें भी सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि आगे क्या होगा। हमारे पास समय और सुविधा दोनों है। हमें इतनी जनसंख्या जरुर बढ़ानी चािहए कि देश की रक्षा और नागरिकों के भयमुक्त माहौल व शांति की स्थापना की जा सके।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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