गोवा के नाइट क्लब में हुए हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इसके मालिक के खिलाफ पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी किया है। लेकिन सौरभ और गौरव लूथरा के कहीं चले जाने की खबरें पढ़ने को मिल रही हैं। इसमे जो जाने गई उसे आकस्मिक आपदा में नहीं रखा जा सकता क्योंकि इसके मालिकों की लापरवाही का ही यह परिणाम कह सकते हैं। क्लब में अग्निकांड हादसा कोई पहला मामला नहीं है और ना ही इसमें लोगों की जान जाने की बात नई है। ऐसी घटनाएं राष्ट्रीय मुददा बनती जा रही हैं जब यह होती है तो सरकार और प्रशासन सुधार के बड़े दावे करता है लेकिन समय बीतने पर सब इसे भूलते चले जाते है। परिणामस्वरूप इसके लिए जिम्मेदार विभाग के लोग अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने की भावना को प्राथमिकता से रखते हुए निर्माण के नियमों का पालन कराना भूल जाते हैं। इसका कारण किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है।
गौरव और सौरभ लूथरा के खिलाफ लुकआउट तो जारी किया ही गया दो अन्य क्लब और ढाबा भी सील किए गए हैं। समय बीतने पर नागरिक इसे भी भूल जाएंगे। सवाल उठता है कि जो इसमें मारे गए और ऐसी घटनाओं में मृतकों और परिवार को कौन न्याय दिलाएगा क्योंकि मुआवजा देने और श्रद्धांजलि अर्पित करने से ना यह घटनाएं रूक पा रही है और ना पीड़ित परिवारेों को न्याय मिल पा रहा है। मेरा पीएम मोदी गृहमंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से आग्रह है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्णय लेने और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की सेवाएं समय से पहले समाप्त कर जिन संस्थानों में ऐसी घटनाएं घटती है उनके लिए जिम्मेदारों को जेल भेजा जाए और पीड़ित परिवारों को पांच पांच करोड़ रूपये की राशि और परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी या व्यापार की सुविधाएं दी जाए लेकिन ऐसी घटनाएं हर हाल में रोकी जाए क्योंकि इनके बारे में पढ़कर आत्मा आहत हो जाती है और लगता है कि इसके लिए जिम्मेदार कब तक बचते रहेंगे। अब कोई समाधान इन आग की घटनाओं का खोजा जाना चाहिए। पटाखा या अन्य फैक्ट्रियों में गरीब आदमी मारे जाते हैं। अब इस प्रकार की घटनाओं से निजात दिलाने के लिए कार्रवाई शीघ्र हो ऐसा मुझे लगता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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