देवघर, 16 जनवरी। देवघर के जिस त्रिकुट पर्वत की चोटियों पर कभी मंत्रों की गूंज और आस्था की शांति बसती थी, आज वहां लैपटॉप और मोबाइल की खामोश क्लिक से साइबर ठगी की साजिशें रची जा रही हैं। रावण के पुष्पक विमान से उतरने की मान्यता वाली यह धरती अब साइबर ठगों का नया ठिकाना बनती जा रही है।
नए साल की शुरुआत के साथ त्रिकुट पर्वत और आसपास साइबर अपराध की गतिविधियों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। एक सप्ताह के अंदर 15 से अधिक संदिग्ध साइबर अपराधियों की लोकेशन यहां मिली है। क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति, घने जंगल और खुफिया रास्ते इन अपराधियों के लिए सुरक्षा कवच बन गए हैं। पर्वत पर कई कच्चे, संकरे और गुप्त रास्ते हैं, जिनकी जानकारी अपराधियों को तो है, लेकिन पुलिस के लिए सभी रास्तों पर एक साथ निगरानी आसान नहीं है। अपराधी यहां सुबह से ही सक्रिय हो जाते हैं।
जालसाजों ने सटीक निगरानी व्यवस्था कर रखी है। ठग पहाड़ पर जाने से पहले सहयोगियों को नीचे के रास्तों, गांवों और मुख्य मार्गों पर तैनात कर देते हैं, जो ‘स्पाई’ की भूमिका निभाते हैं। जैसे ही पुलिस की गाड़ी या संदिग्ध गतिविधि दिखती है ऊपर बैठे ठगों को तुरंत सूचना मिल जाती है। अलर्ट मिलते ही ठग ठिकाना बदल लेते हैं।
यह पहाड़ त्रिदेवों की आराधना का प्रतीक माना जाता है। त्रिकुट पर्वत की गोद में मां दुर्गा का प्राचीन मंडप है। मान्यता है कि इस पर्वत पर माता सीता का पूजा स्थल था।
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