लखनऊ 02 जनवरी। प्रदेश में नई कास्ट डाटा बुक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय करने के बाद बिजली कंपनियों को अब करीब 102 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं को लौटाना होगा। विद्युत नियामक आयोग ने रकम वापसी के लिए अलग से आदेश जारी करने की बात कही है, लेकिन राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द रकम वापस दिलाने के लिए याचिका लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
उत्तर प्रदेश में 9 सितंबर 2025 को जारी आदेश में नया बिजली कनेक्शन लेने पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर दिए गए और उनकी कीमत भी वसूली गई. सिंगल फेस प्रीपेड मीटर के लि 6016 और थ्री फेस स्मार्ट मीटर के लिए 11342 रुपये वसूले गए थे, जो अब घट गए हैं.
नई कास्ट डाटा बुक में सिंगल फेस प्रीपेड स्मार्ट मीटर की कीमत 6016 रुपये की जगह 2800 रुपये और थ्री फेस वाले स्मार्ट मीटर की कीमत 11342 रुपये की जगह 4100 रुपये तय कर दी गई है. 10 सितंबर 2025 से एक जनवरी 2026 तक प्रदेश भर में 318740 बिजली उपभोक्ताओं ने बिजली कनेक्शन लिए, जिनमें सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 90% बिजली उपभोक्ता सिंगल फेस प्रीपेड मीटर लगवाने वाले थे.
यदि मीटर की कीमत 6016 रुपसे के आधार पर आकलन किया जाए तो कुल वसूली लगभग 191 करोड़ की होगी. नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 2800 की दर से यह राशि लगभग 89 करोड़ होती है. ऐसे में बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं के बिल में 102 करोड़ से अधिक की राशि वापस करनी होगी. यह रकम जल्द से जल्द उपभोक्ताओं को लौटाई जाए, इसके लिए उपभोक्ता परिषद की ओर से याचिका लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है.
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर चुनने का विकल्प प्राप्त है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा था। अब नियामक आयोग द्वारा जारी नई कास्ट डाटा बुक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि पोस्टपेड कनेक्शन पर सिक्योरिटी राशि लेकर उपभोक्ता को पोस्टपेड कनेक्शन रखना पूर्णतः कानूनी है।
स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में काम करता है। इसलिए उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में कनेक्शन देना विद्युत अधिनियम के खिलाफ है। नई कास्ट डाटा बुक के जारी होने से नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं, लेकिन उनका मोड (प्रीपेड या पोस्टपेड) उपभोक्ता की सहमति पर ही निर्भर करेगा। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि कार्पोरेशन प्रबंधन अथवा निगमों के प्रबंधन उपभोक्ताओं को जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाते हैं तो इसका विरोध किया जाएगा। नियामक आयोग में याचिका लगाई जाएगी।

