प्रयागराज, 02 मई (ता)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी फरार अपराधी को पकड़ने के लिए उसके निर्दाेष रिश्तेदारों को प्रताड़ित करना अनुचित ही नहीं, असंवैधानिक भी है। कोर्ट के अनुसार अपराधियों की तलाश के लिए उनके स्वजन को ढाल बनाना या उन्हें थाने बुलाकर मानसिक दबाव डालना अंग्रेजों के जमाने का पुराना तरीका है, जो आधुनिक लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे के हिसाब से उचित नहीं है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अवकाश प्राप्त कैप्टन मंगल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने पुलिस को भविष्य में याची के घर दबिश देने या उन्हें किसी भी तरह से परेशान करने से रोक दिया है।
कानपुर नगर के बर्रा थाना क्षेत्र निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन मंगल सिंह ने अदालत से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उनके बेटे संदीप तोमर को पंजाब के अबोहर में हत्या के एक मामले में दोषी करार दिया गया था।
बेटा सजा सुनाए जाने के बाद से फरार चल रहा था। पंजाब पुलिस की सूचना पर स्थानीय कानपुर पुलिस ने संदीप की तलाश में उसके वृद्ध माता-पिता के घर पर न केवल छापेमारी की, बल्कि उन्हें बार-बार पुलिस चौकी और थाने बुलाकर प्रताड़ित भी किया।
याची का तर्क था कि उन्होंने अपने बेटे की अनैतिक गतिविधियों के कारण उसे बहुत पहले ही अखबारों में विज्ञापन देकर बेदखल कर दिया था और अब उनका उससे कोई संबंध नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस कमिश्नर कानपुर नगर के उस व्यक्तिगत हलफनामे की आलोचना की, जिसमें कहा गया था कि याची ने अपने बेटे को बेदखल करने का कोई ‘आधिकारिक प्रमाण पत्र’ पेश नहीं दिया है।
कोर्ट ने कहा कि कानून की नजर में किसी संतान को पूरी तरह से त्यागने या बेदखल करने का ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी करने वाली अथॉरिटी अस्तित्व में ही नहीं है। इसलिए पुलिस की यह मांग पूरी तरह से गलत और कानून की गलत समझ पर आधारित है। आज के डिजिटल युग में जब पुलिस के पास किसी व्यक्ति का पता लगाने के लिए उन्नत तकनीकी साधन मौजूद हैं, तब भी रिश्तेदारों को प्रताड़ित करने जैसा पुराना ढर्रा अपनाना पुलिस की अक्षमता दर्शाता है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि पंजाब पुलिस द्वारा वांछित को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इस पर कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए थानाध्यक्ष गुजैनी को कड़ी चेतावनी दी कि भविष्य में याची की निजता और गरिमा का उल्लंघन न किया जाए। यदि भविष्य में संदीप तोमर पैरोल या जमानत पर बाहर आता है और शर्तों का उल्लंघन करता है, तब भी पुलिस को उसके माता-पिता को प्रताड़ित करने का कोई अधिकार नहीं होगा। कोर्ट ने आदेश की प्रति पुलिस कमिश्नर और संबंधित थाना प्रभारी को अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है।
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