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    5700 युवाओं को गंगा एक्सप्रेसवे पर मिलेगा रोजगार

    adminBy adminApril 29, 2026No Comments2 Views
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    लखनऊ, 29 अप्रैल (ता)। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण खंड (पैकेज) पर सूरज की नर्म रोशनी के साथ हलचल तेज हो चुकी है। दूर तक फैली नवनिर्मित डामर की सड़क पर सफेद पट्टियां चमक रही हैं। हर किलोमीटर पर स्थापित आधुनिक कैमरे इस बात का प्रमाण हैं कि इस एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और निगरानी को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए जाने से पूर्व, इस एक्सप्रेसवे की जमीनी हकीकत का जायजा लेने पर सुरक्षा, तकनीक और रोजगार के मोर्चों पर एक बदलती हुई तस्वीर दिखाई देती है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन करने से पहले इस एक्सप्रेसवे के एक हिस्से पर ग्राउंड जीरो से हकीकत परखी। सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और रोजगार तीनों मोर्चों पर तस्वीर बदलती नजर आई। जैसे ही हमारी गाड़ी आगे बढ़ती है, कुछ दूरी पर लगे पोल पर कैमरा साफ दिखता है। साइट इंजीनियर कहते हैं कि पूरे 594 किलोमीटर में हर एक किलोमीटर पर एआई कैमरे हैं।
    ये कैमरे सिर्फ स्पीड नहीं मापते, बल्कि सीट बेल्ट लगी है या नहीं, वाहन लेन में है या नहीं और ओवरस्पीडिंग या खतरनाक ड्राइविंग सब कुछ रियल टाइम में कैच होता है। ये कैमरे कंट्रोल रूम के साथ सीधे परिवहन विभाग से जुड़े हैं यानी नियमों का उल्लंघन होते ही सीधे चालान कटेगा और आपके मोबाइल पर मेसेज आ जाएगा। इसके अलावा करीब 5700 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है।
    गंगा एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वालिटी और सड़क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने पहली बार अत्याधुनिक स्विस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसके तहत रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई। पहले परंपरागत रूप से सड़क की जांच निर्माण पूरा होने के बाद की जाती थी, लेकिन इस तकनीक की मदद से निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता और खामियों को परखा गया। एआई और सेंसर आधारित सिस्टम के लिए स्विटजरलैंड की कंपनी ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेटरीज एजी द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेंसर मॉड्यूल का उपयोग किया जा रहा है।
    निरीक्षण के लिए सात हाई-प्रिसिजन (उच्च-सटीकत्ता) सेंसरों से लैस एक वाहन का उपयोग किया गया, जिसमें चार सेंसर सड़क की सतह की गुणवत्ता और एकरूपता की जांच के लिए हैं। तीन सेंसर वाहन के मोशन और यात्रियों के आराम को मापने के लिए हैं। यह तकनीक कंपन (वाइब्रेशन) और एक्सेलेरोमीटर के जरिए सड़क की ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और सतह की सुगमता का डाटा एकत्र करती है, जिसे ऑनलाइन ग्राफ के माध्यम से वास्तविक समय में देखा जा सकता है। इस तरह निर्माण के दौरान ही खामियों का पता चलने से इंजीनियरों ने तुरंत सुधार किया। गंगा एक्सप्रेसवे के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर महावीर के मुताबिक यह पूरी तरह श्डायनामिक टेस्टिंगश् है। यानी लैब नहीं, असली सड़क पर असली स्पीड में जांच।
    औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी का कहना है कि यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि नए भारत और नए उत्तर प्रदेश की तेज रफ्तार, सशक्त सोच और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक है। आज प्रदेश एक्सप्रेसवे नेटवर्क के मामले में देश में अग्रणी बन रहा है, और गंगा एक्सप्रेसवे इस विकास यात्रा का एक मील का पत्थर साबित होगा। यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज के व्यापार, सेवा क्षेत्र और स्थानीय उद्योगों को नई गति देगा। संगम नगरी में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा और अधिक सहज होगी।
    एक्सप्रसेवे के अधिकारियों ने दावा किया है कि यहां जो सिस्टम तैयार किया गया है, वह पारंपरिक टोल से आगे है। इसमें फास्टैग बेस्ड कलेक्शन, एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) और भविष्य में जीपीएस टोलिंग की तैयारी का रोडमैप है। यानी गाड़ी की रफ्तार कम किए बिना टोल कटेगा।
    एक्सप्रेस-वे के किनारे बसे गांवों में इस प्रोजेक्ट का असर दिखता है। एक्सप्रेस तैयार करने वाली कंपनी के अनुसार 518 गांवों के करीब 5700 युवाओं को रोजगार दिया है। इसमें से लगभग 1200 लोग टोल ऑपरेशन में हैं। 2500 लोग श्रम आधारित काम में हैं और 2000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।

    5 700 Youths to Get Employment on the Ganga Expressway GANGA EXPRESSWAY lucknow tazza khabar in hindi
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