ग्वालियर, 28 अप्रैल (ता)। न्याय की दहलीज पर झूठ बोलकर जीत हासिल करना कितना भारी पड़ सकता है, इसका उदाहरण ग्वालियर खंडपीठ में पहुंचा यह ताजा मामला है। यहां एक महिला ने अपने पति से अलग होने के लिए ऐसी साजिश रची कि सुनने वाले दंग रह गए। महिला ने फैमिली कोर्ट में अपने पति की सगी बहन को ही उसकी ‘दूसरी पत्नी’ करार दे दिया और एक पारिवारिक तस्वीर को अवैध शादी का सबूत बताकर पेश कर दिया। हैरानी की बात यह है कि इस झूठ के आधार पर कोर्ट ने एकतरफा तलाक की डिक्री भी जारी कर दी।
स्थिति कुछ ऐसी बनी कि कोर्ट ने एक फोटो को आधार मानते हुए पति को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया और महिला को विवाह विच्छेद की डिक्री तक मिल गई। अब पति ने इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
जानकारी के अनुसार 46 वर्षीय महिला का विवाह वर्ष 1998 में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। उसका पति मार्केटिंग कंपनी में अधिकारी है और काम के सिलसिले में अकसर बाहर रहता था। इसी की वजह से दोनों के बीच विवाद बढ़ते गए और वर्ष 2015 से दोनों अलग रह रहे थे। महिला किसी भी कीमत पर पति से तलाक चाहती थी, जबकि पति इसके लिए तैयार नहीं था। महिला ने विवाह विच्छेद के लिए वर्ष 2021 में कुटुंब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। पति पर दूसरी शादी करने का आरोप लगाया। साक्ष्य के तौर पर उसने एक फैमिली फोटो प्रस्तुत किया। इसमें पति अपनी बहन और अन्य रिश्तेदारों के साथ खड़ा था। महिला ने अपनी ननद को पति की दूसरी पत्नी कह दिया था।
पति का कहना है कि मुकदमा वर्ष 2021 में दर्ज हुआ। इस दौरान कोरोना महामारी भी थी, सुनवाई के दौरान उसकी मां का निधन हो गया था और वह पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त था। इसका फायदा उठाकर पत्नी ने कोर्ट से एकतरफा निर्णय करवा लिया। इसी माह जब उसे इस विवाह विच्छेद की जानकारी मिली। कोर्ट का रिकॉर्ड देखा तो पता चला कि जिस महिला को दूसरी पत्नी बताया गया था, वह उसकी सगी बहन थी। अब पति ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। एडवोकेट धर्मेंद्र शर्मा के अनुसार यह मामला कोर्ट को गुमराह कर झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने का है, जिस पर जल्द सुनवाई होगी।
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