नई दिल्ली, 20 अप्रैल (ता)। भारत में चुनावी व्यवस्था से जुड़ा बड़ा राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नया प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारों के अनुसार, कई विपक्षी पार्टियों के नेता इस मुद्दे पर एक साथ बातचीत कर रहे हैं और नई नोटिस तैयार की जा रही है। इस पहल में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत कई दलों के कम से कम पांच वरिष्ठ सांसद शामिल बताए जा रहे हैं।
विपक्ष का लक्ष्य इस बार ज्यादा समर्थन जुटाने का है और करीब 200 सांसदों के हस्ताक्षर हासिल करने की कोशिश हो रही है, ताकि मजबूत दबाव बनाया जा सके। विपक्ष का कहना है कि इससे पहले भी जो नोटिस दिए गए थे, उन्हें खारिज कर दिया गया था, लेकिन अब वे इस मुद्दे को और मजबूती से उठाना चाहते हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और कई फैसले पक्षपातपूर्ण दिखाई देते हैं।
मामले में विपक्ष ने पहले भी आरोप लगाए थे कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और कामकाज में पारदर्शिता की कमी है और कई फैसले सरकार के प्रभाव में लिए गए हैं। इसके साथ ही विशेष मतदाता सूची सुधार (एसआईआर) जैसी प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए थे, जिससे मतदाता अधिकार प्रभावित होने की बात कही गई थी।
मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है।
जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के मुताबिक, अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जांच समिति तभी बनेगी जब दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाएंगे।
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