संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिर जाने के बाद महिला आरक्षण से जुड़ा यह बिल भी पास नहीं हो सका क्योंकि उसके लिए ३५२ वोट मिलने चाहिए थे और मिले २९८ और विरोध में २३० पड़े। १२ साल में पहली बार कोई विधेयक ऐसा रहा जिसे सत्ताधारी दल पास नहीं करा पाया। अब ५४ मतों से गिरा बिल और इसी से जुड़े दो विधेयक सरकार ने वापस लिए। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण बिल को गिराकर कोई कैसे जश्न मना सकता है। यह निदंनीय है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हुए हमले को विफल कर दिया है। अब महिलाओं के आरक्षण को बंधी उम्मीद धूमिल हो गई। अब एनडीए के महिला आरक्षण विधेयक को नाकाम करने के खिलाफ अभियान चलाने की बात आ रही है। अंतर आत्मा की आवाज पर वोट की अपील का मुददा भी काम नहीं आया। पहली बार विपक्ष किसी मामले में जीत हासिल करने में सफल रहा। इस बारे में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी का कहना है कि हमने सरकार की साजिश को नाकाम किया है। लोकतंत्र की जीत हुई है। उन्होंने प्रेसवार्ता में कहा कि महिलाओं का मसीहा बनना आसान नहीं है। सरकार लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की साजिश कर रही थी। फिलहाल संसद की कार्यवाही अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। दूसरी ओर खबर के अनुसार विधानसभा में महिला आरक्षण लागू करने की अधिसूचना जारी की गई है।
इसे विपक्ष भले ही अपनी जीत बता रहा हो और सरकार को पहली बार कोई विधेयक पास ना कराने का अफसोस हो रहा हो लेकिन एक बात कही जा सकती है कि अब एनडीए की महिला सांसदों द्वारा जो आंदोलन चलाया जाएगा उसका विपक्ष को नुकसान होना हर हाल में तय है। वो बात दूसरी है वो कितना होगा। क्योंकि पिछले दिनों सभी विपक्षी दलों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई बैठक में कहा था कि वो महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि लोकसभा में इन्हें मिलकर अपनी बात स्पष्ट करनी चाहिए थी कि हम महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं सरकार उसे अलग से लाए तो जो नुकसान और विपक्ष के खिलाफ माहौल नहीं बनता। संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरा हो सकता है कि विपक्ष की सोच सही हो लेकिन महिला आरक्षण का पास ना होना किसी भी रुप में सही नहीं कह सकते। देश में भले ही हमेशा ही पुरुष प्रधान व्यवस्था रही हो लेकिन महिलाओं का योगदान हर क्षेत्र में कम नहीं है। आदिकाल से महिलाओं की वीरता के किस्से इसका प्रतीक भी हैं। पूर्व में जो महिलाओं के बयान आ रहे थे जैसे बसपा सुप्रीमो मायावती ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया और देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और लोकसभा अध्यक्ष रही मीरा कुमार आदि द्वारा इस बारे में सकरात्त्मक राय से स्पष्ट हो रहा था कि यह बिल इतनी बुरी तरह से नहीं गिरेगा क्योंकि जो फर्क सामने आया वो काफी चौंकाने वाला है। इस ओर भी इशारा करता है कि आखिर सरकार प्रधानमंत्री के मन की आवाज पर वोट देने के आहृ़वान पर समर्थन क्यों नहीं जुटा पाई। अब बात साफ हो गई है कि २०२९ के लोकसभा चुनाव तक विपक्ष आने वाले विधेयकों पर ऐसा माहौल ना बना पाए लेकिन इस विधेयक के गिरने पर एक असहज स्थिति उत्पन्न करता रहेगा।
क्योंकि आप पार्टी के राज्यसभा सदस्य पर जो आरोप लगाकर उन्हें अलग थलग पार्टी में किया है उससे यह लगा है कि राजनीतिक असहमतियों का दमन चिंताजनक है और मुझे लगता है कि यह भविष्य में सत्ताधारी दल के शायद काम आ सकता है क्योंकि सभी दलों में आपस में वैचारिक मतभेद होने की बात से इनकार नहीं कर सकते। मेरा मानना है कि विपक्ष को महिला आरक्षण के मुददे पर कोई और रणनीति अपनानी चाहिए थी और विरोध के साथ स्पष्ट करना चाहिए था कि महिला आरक्षण विधेयक पास हो हम उसके साथ हैं। हम संविधान संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं ना कि महिला आरक्षण का।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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