देश की जानी मानी वरिष्ठ लेखक आलोचक आरआर जयरथ द्वारा अपने कॉलम ताकझांक में दो मुददे उठाए गए उन्होंने लिखा कि भाजपा वाटसऐप की दुनिया में इतनी रचबस गई है कि संसद के विशेष सत्र के लिए बैंकग्राउंड ब्रीफ की इसी के जरिए सर्कुलेट किया गया जिससे कई नियमों को नजरअंदाज किया गया है। इनका कहना है कि जिन संशोधनों को पािरत करने की चर्चा है वह कानून मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं लेकिन विपक्ष को इसकी जानकारी अमित शाह के कार्यालय से मिली। ऐसे मुददों पर सर्वदलीय बैठक में चर्चा होनी चाहिए या संबंधित मंत्रालय के लेटरपेड पर जारी करना चाहिए था। उन्होंने लिखा कि चुनावी नक्शे की पूरी तरह उनका लापरवाही रवैया बदल देंगे। क्योंकि वॉटसऐप मैसेज १६ अप्रैल से पहले आया था जिस दिन सत्र शुरु होना था और बिल सांसदों को सत्र शुरु होने से दो दिन पहले सर्कुलेट किया गया जिससे विपक्ष को अध्ययन करने के लिए बहुत ही कम समय मिल पाया। आरआर जयरथ ने चिंता व्यक्त की है कि अगर वॉटसऐप ही संसदीय संचार का भविश्य बनने वाला है तो फिर विशाल सचिवालय को फंड देने का कोई मतलब नहीं रह जाता जिसका काम संसद से जुड़े सभी मामलों बुलेटिनों और चिटिठयों को संभालना होता है।
अगर आरआर जैरथ का मत कानून के मामले में गलत नहीं कह सकते लेकिन यह जरुर है कि अब अगर महत्वपूर्ण मुददों पर चिटठी लेटर भेजने का काम किया जाएगा तो जो चारों तरफ आवाज उठती है कि काम में तेजी लाई जाए वो चिटठी पत्री से संभव नहीं है इसलिए वॉटसऐप को अपनानान वक्त की बड़ी मांग है। जिससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता। जो बिंदु उठाए गए हैे सरकार को उन पर सुधार करने की कोशिश जरुर करनी चाहिए। क्योंकि चिठठी पत्र पर आने वाला खर्च ज्यादा आता है इसलिए इसके बारे में भी नीति घोषित की जाए। आरआर जयरथ की बात से मैं सहमत हूं कि परिसीमन पर चल रही बहस में अहम मुददे को नजर अंदाज कर दिया गया वह यह है कि संसद के खजाने पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ अहम है इस पर ध्यान देने की जरुरत है ना कि ५४३ से बढ़ाकर सदस्य संख्या ८१६ की जाए क्योंकि इससे विधानसभाओं की सदस्य संख्या में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी जिससे सरकारी खजाने पर बोझ पड़ना तय है। कहा जा रहा है कि लोकसभा के पांच साल के कार्यकाल में लगभग ५८५५ करोड़ का खर्च आता है। इसके अलावा हर सांसद को पांच करोड़ सांसद निधि, मुफ्त आवास, यात्रा भत्ता, चिकित्सा सुविधा स्टाफ और चिकित्सा मिलती है ऐसे में पांच साल का कार्यकाल ८१६ सांसदों के वेतन पर टैक्स देने वालों पर पड़ने वाले खर्च के अनुमान बढ़कर ५०,००० करोड़ के बीच है इसमें भत्ते और सुविधाएं शमिल नहीं है।
आरआर जयरथ ने कई मुददे उठाए और सही भी लगते हैं लेकिन वॉटसऐप से जो खर्च कम होने वाला है उसका उन्होंने नजर अंदाज किया मगर सांसदों की संख्या बढ़ने से खजाने पर पड़ने वाले बोझ पर चिंता व्यक्त की है। खर्च चाहे सौ रुपये का कम हो या करोड़ों का बढ़े आखिर है तो एक ही बात इसलिए जो सोशल मीडिया को वॉटसऐप ग्रुप के नाम पर टारगेट किया गया है वो सही नहीं है। उनके मुददे सभी सही है नियम कानूनों का पालन होना चाहिए। यह जो वीआईपी गाड़ियों का बड़ा काफिला चलता है उसमें पैसे और जनशक्ति के सही उपयोग केलिए मित्तव्यतिता बरती जानी च ाहिए यह वक्त की सबसे बड़ी मांग है । वाटसऐप का लोग कितना ही विरोध करते रहे लेकिन यह रोजमर्रा के कामों में बस गया है और इसके काम हर किसी को आकर्षित कर रहे हैं। इसलिए सोशल मीडिया मंचों को टारगेट ना किया जाए। इसका विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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