Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • नौतपा गर्मी से बचाने के लिए नीबू शरबत का वितरण और सब जगह छप्पर की हटे बनवाई जाए
    • नौतपा तो हर साल आता है गर्मी भी खूब पड़ती है इससे डराने की बजाय बिजली की फिजूलखर्ची बंद हो! आम आदमी के लिए प्याऊ और कुछ दूरी पर झोपड़ियां बनवा दी जाए तो वो जनहित में अच्छा प्रयास होगा, गंगा दशहरों पर नदियों में स्नान को उमड़े श्रद्धाुल
    • मंडलायुक्त ने मांगी अवैध निर्माणों की सूचना, मेडा के अधिकारी फर्जी निस्तारण कच्ची कालोनी, जमीन घेरने और गलत निर्माण करने वालों को बचाने में लगे, सर सहयोगियों की एक टीम बनाकर जांच कराईये
    • सोनम कपूर ने लंदन में खरीदा घर, पड़ोसियों ने किया विरोध
    • आईसक्रीम दही, दलिया मौसमी फल आम आदमी को ही नहीं मिल रहे हैं हाथियों को ठंडक कैसे पहुंचायेंगे, पशु पालन अधिकारी घने वनों की संख्या बढ़ायें वह ही इनके लिए उपयुक्त है
    • 180 किलो सोना खरीदा आरबीआई ने
    • कृति ने फिल्मी दुनिया में 12 साल पूरे होने पर बयां की दिल की बात
    • चीन में बैठे भारतीय डाक्टर ने हैदराबाद में की रोबोटिक सर्जरी
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण है सही, सनातन धर्म की मजबूती और बहुसंख्यकों की एकता के लिए सभी को मंदिरों में जाने का हो अधिकार
    देश

    उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण है सही, सनातन धर्म की मजबूती और बहुसंख्यकों की एकता के लिए सभी को मंदिरों में जाने का हो अधिकार

    adminBy adminApril 10, 2026No Comments8 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    सीजेआई के अलावा जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस सुंदरेश, जस्टिस एहसानुद्दीन, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी वराले, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जायमाला बराची आदि की प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत जी की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ जो आजकल धार्मिक स्थलों में महिलाओं से भेदभाव के साथ कानूनी सवालों पर विचार कर रही हैं के द्वारा की गयी टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि कोई भी चीज अंधविश्वास है कि नहीं यह तय हम करेंगे शीर्षक से छपी खबर में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर में प्रवेश सीमित करने से समाज बंटेगा धर्म मजबूत नहीं कमजोर होगा। प्रतिबंध से समाज बंटेगा जो हिन्दू धर्म के लिए अच्छा नहीं है। अदालत ने कहा कि सभी को मठ मंदिर में प्रवेश का पूर्ण अधिकार हो इस संदर्भ में कोई कानून बने तो उसे सार्वजनिक व्यवस्था नैतिकता स्वास्थ्य की कसौटी पर खरा उतरना होगा जैसे बिन्दु जो इन मामलों में उभर कर आ रहे हैं उससे यह स्पष्ट है कि मंदिर मठों में प्रवेश में भेदभाव किसी के लिए भी अच्छा नहीं है अदालत जो निर्णय लेगी वह अलग है लेकिन समाज में जो आज बहुसंख्यकों को संगठित करने की जो व्यवस्था तभी पूरी हो सकती है जब महिला पुरूष वृद्ध और बच्चे मंदिरों में जाने की अनुमति हो और समाज के किसी भी वर्ग जो इससे संबंध है उससे कहीं भी जाने से रोका नहीं जाना चाहिए। कहीं महिलाओं के मंदिर जाने पर रोक तो कहीं पुरूषों के साथ ऐसा हो रहा है जिस कारण केरल के कुछ मंदिरों में पुरूषों को महिलाओ की भांति श्रंगार कर और साड़ी पहनकर कुछ मंदिरो में जाने की बात भी सामने आ रही है। यह भले ही एक धार्मिक परंपरा के हिसाब से हो रहा लेकिन अब समाज में हर वर्ग भगवान के प्रति पहले के मुकाबले ज्यादा समर्पित भाव से आस्था रखता है ऐसे में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास के चलते बहुसंख्यक समाज में बिखराव हो जाने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। वैसे तो इस संदर्भ में अदालत सरकार और प्रमुख नागरिकों में उच्चस्तरीय विचार-विमर्श चल रहे हैं मगर आम आदमी के दृष्टिकोण से देखा जाये तो सबसे पुराने हिन्दू संस्कृति से जुड़े सनातन धर्म को और आगे बढ़ाने के लिए सभी जातियों और वर्गों के हिन्दू समाज से जुड़े लोगों को हर मंदिर और पूजा स्थान में अगर वह आस्था के साथ पहुंचता है तो उसे पूर्ण सम्मान और पूजा का अधिकार मिलना चाहिए जो उसके मानवीय अधिकारों से भी जुड़ा है। बाकी तो जो फैसला सुप्रीम कोर्ट देगा या जो नीति सरकार बनायेगी अथवा जिसको सर्व समाज द्वारा मान्यता दी जायेगी वही सही है भगवान सबके हैं केवट ने राम जी को पार लगाया था अपनी नाव मैं बैठाकर तो भगवान ने सबरी के झूठे बेर भी खाये थे क्योंकि वह उनकी श्रद्धाभाव से ऐसा किया जा रका है तो सबकुछ छोड़कर मानव जाति जो हमारे हिन्दू धर्म और सनातन धर्म में आस्था रखते हैं उनमें भेदभाव बिल्कुल भी ठीक नहीं कहा जा सकता। वर्तमान समय में भी समाज में भाईचारा, सद्भाव वक्त की सबसे बड़ी मांग बन रहा है और यह सबकों बराबर का अधिकार धर्म और पूजा के मामले में सभी को दिया जाये तभी यह संभव होगा। माननीय उच्च न्यायालय ने तो अपना मत स्पष्ट कर दिया है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    नौतपा गर्मी से बचाने के लिए नीबू शरबत का वितरण और सब जगह छप्पर की हटे बनवाई जाए

    May 25, 2026

    नौतपा तो हर साल आता है गर्मी भी खूब पड़ती है इससे डराने की बजाय बिजली की फिजूलखर्ची बंद हो! आम आदमी के लिए प्याऊ और कुछ दूरी पर झोपड़ियां बनवा दी जाए तो वो जनहित में अच्छा प्रयास होगा, गंगा दशहरों पर नदियों में स्नान को उमड़े श्रद्धाुल

    May 25, 2026

    मंडलायुक्त ने मांगी अवैध निर्माणों की सूचना, मेडा के अधिकारी फर्जी निस्तारण कच्ची कालोनी, जमीन घेरने और गलत निर्माण करने वालों को बचाने में लगे, सर सहयोगियों की एक टीम बनाकर जांच कराईये

    May 25, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.