विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) 09 अप्रैल। हेयर कटिंग की दुकान (सैलून) चलाने वाले एक व्यक्ति को 72 लाख रुपये जीएसटी भुगतान करने का नोटिस मिला है. इतना ही नहीं उसका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया है. बताया जाता है कि विजयवाड़ा के पंजा सेंटर इलाके में एक छोटी सी नाई की दुकान (सैलून) चलाने वाले श्रीनिवास राव को जीएसटी अधिकारियों से 72 लाख रुपये टैक्स के भुगतान का नोटिस भेजा है.
अधिकारियों ने उसका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया है. पीड़ित व्यक्ति के द्वारा सवाल भी उठाया गया है कि विशाखापत्तनम में किए गए करोड़ों के बिजनेस के लिए लाखों रुपये के जीएसटी बकाए की मांग वाले नोटिस से परेशान किया जा रहा है, जबकि वह पिछले 40 सालों से विजयवाड़ा में एक छोटा सा सैलून चलाकर बस गुजारा कर रहा है.
श्रीनिवास राव ने बताया कि टैक्स से जुड़ी यह परेशानी उन्हें पिछले छह सालों से परेशान कर रही है. मई 2021 में, श्रीनिवास राव सरकारी वेलफेयर स्कीम के लिए आवेदन करने के लिए अपने स्थानीय वार्ड सेक्रेटेरिएट गए. लेकिन, वह तब हैरान रह गए जब स्टाफ ने उनका विवरण ऑनलाइन वेरिफाई करने के बाद उन्हें बताया कि वह वेलफेयर लाभ के लिए अयोग्य हैं क्योंकि वह विशाखापत्तनम में एक बिजनेस चलाते दिख रहे थे और जीएसटी भी पे कर रहे थे.
इसके बाद राव वह तुरंत अधिकारियों से मिलने के लिए शहर के जीएसटी ऑफिस पहुंचे. उन्होंने काफ मिन्नत करते हुए बताया कि उनके नाम से कोई बिजनेस नहीं है और उन्होंने कभी जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन भी नहीं किया, लेकिन फिर उनकी समस्या पर किसी ने ध्यान नहीं दिया.
इसके बाद, 2022 में, श्रीनिवास राव को जीएसटी बकाया भुगतान की मांग वाला एक और नोटिस मिला. हालांकि वह अपनी स्थिति बताने के लिए एक बार फिर अधिकारियों से मिले, लेकिन उन्हें कोई सही जवाब नहीं मिला. इस संबंध में राव ने विजयवाड़ा टू टाउन पुलिस स्टेशन और सिटी पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला.
हाल ही में, इस साल फरवरी में, श्रीनिवास राव को एक नोटिफिकेशन मिला जिसमें बताया गया कि बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र में उनका खाता फीज कर दिया गया है.
मामले की जानकारी लेने के लिए बैंक जाने पर उन्हें बताया गया कि जीएसटी अधिकारियों के नोटिस के जवाब में खाता फ्रीज कर दिया गया है. इसके बाद, श्रीनिवास राव को जीएसटी अधिकारियों से 72 लाख रुपये के भुगतान की मांग वाले नोटिस मिले.
समझा जाता है कि किसी ने उनके आधार और पैन कार्ड विवरण का इस्तेमाल करके जीएसटी लाइसेंस लिया, और विशाखापत्तनम में बड़े पैमाने पर बिजनेस किया, टैक्स चोरी की और बाद में फरार हो गया.

