पटना 07 अप्रैल। 20 करोड़ की सोना लूट मामले को लेकर सनसनीखेज खुलासा हुआ है। गुजरात (राजकोट) में बैठे शख्स ने पटना में सबकुछ सेट कर दिया। शनिवार को बीच सड़क दिन-दहाड़े खगौल लख के पास (दानापुर) 20 करोड़ के 15 किलो सोने के गहने की लूट हुई थी। अब एसआईटी की जांच में ये बात सामने आई है कि इस पूरी साजिश का सूत्रधार गुजरात में बैठा एक शख्स है। जिसे हाल ही में पीड़ित सोना कारोबारी सुनील भाई ने नौकरी से निकाला था। बदमाशों ने पूरी साजिश के साथ राजकोट के कारोबारी के स्टाफ को निशाना बनाया। खगौल लख के पास कस्टम अधिकारी बनकर वारदात को अंजाम दिया। 40 पुलिसकर्मियों की टीम अपराधियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही है। फिलहाल, पुलिस को लुटेरों के फेंके गए जीपीएस बैग और चोरी के वाहनों से कई अहम सुराग मिले हैं, जिनकी कड़ियां बिहार से लेकर गुजरात तक जुड़ी हुई हैं।
पटना पुलिस की जांच में सामने आया है कि लूट की इस बड़ी वारदात का मास्टरमाइंड गुजरात का रहने वाला है। वो पीड़ित कारोबारी का पूर्व कर्मचारी है। उसे रास्ते और डिलीवरी के समय की पूरी जानकारी थी। उसी ने बिहार के 6 शातिर लुटेरों को ‘सेट’ किया और 15 किलो सोने के गहने लूटने की पूरी पटकथा तैयार की। लुटेरों ने लूट के तुरंत बाद बैग में लगा जीपीएस निकाल कर फेंक दिया था ताकि पुलिस उनकी लोकेशन ट्रैक न कर सके।
वारदात में इस्तेमाल की गई कार और बाइक पुलिस ने बरामद कर ली है। जांच में पता चला कि इस्तेमाल की गई पटना सोना लूटकांड में कार दिल्ली से चोरी हुई थी, जिस पर पूर्णिया के एक व्यक्ति की गाड़ी का फर्जी नंबर लगा दिया गया था। वहीं, बाइक एम्स गोलंबर के पास से लावारिस हालत में मिली। पुलिस ने बाकरगंज के उस कारोबारी से भी पूछताछ की है, जिसके पास ये गहने डिलीवर होने वाले थे।
एसआईटी की टीम कारोबारी के स्टाफ महेश मामतोरा और प्रिंस कुमार के मोबाइल नंबरों की सीडीआर खंगाल रही है। पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या घटनास्थल से लेकर नौबतपुर तक इनके मोबाइल एक्टिव थे या नहीं। हालांकि, लुटेरों ने महेश का मोबाइल लूटकर बंद कर दिया था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या स्टाफ की गतिविधियों में कोई संदिग्ध पहलू है क्योंकि वे पहले भी कई बार सोना पटना ला चुके हैं। हालांकि, इस मामले पुलिस ने अबतक देश के सबसे बड़े सोना लुटेरे सुबोध सिंह का नाम नहीं लिया है।
लूट की इस घटना में कई रहस्यमयी एंगल भी है। लुटेरों ने बैग लूटने के बाद केवल महेश को ही कार में क्यों बिठाया और प्रिंस को क्यों छोड़ दिया? नौबतपुर ले जाकर महेश को कार में अकेला छोड़ना और उसका हाथ-मुंह बांधना भी संदेह के घेरे में है। पुलिस ये समझने की कोशिश कर रही है कि महेश ने इतनी आसानी से अपना बंधन कैसे खोल लिया और खुद ही थाने कैसे पहुंच गया? इन उलझे हुए सवालों के जवाब अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद ही मिल पाएंगे।

