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    सांसद डॉ राजकुमार सांगवान का सराहनीय प्रयास! महंगी किताब ड्रेस लेने के लिए मजबूर करने वाले स्कूल संचालकों और विक्रेताओं पर जनहित में लगाई जाए रासुका

    adminBy adminApril 4, 2026No Comments7 Views
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    बागपत लोकसभा क्षेत्र से रालोद सांसद डॉ राजकुमार सांगवान ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर निजी स्कूलों में महंगी किताबों के नाम पर अभिभावकों के होने वाले आर्थिक शोषण को रोकने की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मध्यम व निम्र आय वर्ग लोगों को इस कारण आर्थिक बोझ झेलना पडृ रहा है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की सस्ती व महत्वपूर्ण पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशनों की महंगी पुस्तकों को अनिवार्य कर रहे हैं। ध्यान से देखें तो डॉ राजकुमार सांगवान द्वारा महत्वपूर्ण जनहित का मुददा उठाया गया है। क्योंकि कुछ बड़े स्कूलों के संचालक व प्रधानाचार्य आदि स्थानीय बुक सेलरों से मिलीभगत कर छह से दस गुना महंगी किताबें जो शायद पूरे साल भी या तो बच्चे पढ़ते ही नहीं या कभी देख लिया तो कुछ अभिभावकों के अनुसार यह महंगी किताबे किसी उपयोग की नहीं होती। सिलेबस में लगी होती है इसलिए खरीदना मजबूरी है क्योंकि बुक सेलर काफी मोटा कमीशन देकर अपनी किताबे लगवाते हैं इसलिए उन्हें खरीदना अनिवार्य किया जाता है और स्कूल प्रबंधन व शिक्षक किसी विशेष बुक सेलर द्वारा छपवाकर दिए गए सिलेबस की सूची दी जाती और बच्चे के स्कूल जाने पर यह देखा जाता है कि जहां से कहा गयाथा वहां से ली है या नहीं। इतना ही नहीं तमाम स्कूल अब पिछले एक दशक से जूते टाई ड्रेस सहित मौजे भी एक निर्धारित स्थान से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। बताते हैंं कि कई जगह तो ५० प्रतिशत कमीशन लिए जाने की बात सामने आई है। अगर इतना कमीशन स्कूल वाले लेंगे तो बच्चों को किताब ड्रेस जूते मौजे और टाई भी निर्धारित स्थान से खरीदने होंगे। ऐसा नहीं है कि यह मुददा पहली बार उठ रहा है। हर बार इस विषय को लेकर अभिभावक ऐतराज जताते हैं और अफसरों से शिकायत की जाती है। सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया था और एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन यह किसकी मिलीभगत है कि ये पुस्तक समय से नहीं छपती। ज्यादातर छात्र जब सिलेबस खरीद चुके होते हैं तब किताब बाजार में आती हैं। सांसद राजकुमार सांगवान ने यह जनहित का मुददा जो उठाया है बहुत जरुरी है। चुनाव के दौरान जनता से वोट मांगते समय उनके हित और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए काम की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों को ऐसे मुददे पर सवाल उठाने चाहिए क्योंकि एक दो हजार में मिलने वाला सिलेबस आठ हजार तक में खरीदना पड़ रहा है। सरकार इसे देखें क्योंकि अब समय आ गया है कि स्कूल संचालकों और बुक सेलरों की कार्यप्रणाली पर रोक लगाई जाए और जहां अभिभावकों का शोषण हो रहा हो उन पर रासुका की कार्रवाई स्कूलों व विक्रेताओं पर की जाए क्योंकि यह महंगाई इस दौर में किसी को पचती नहीं है। सरकार हर जिले में डीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाए जिसमें स्कूल संचालकों बुक सेलरों व जनहित में काम करने वालों को रखा जाए लेकिन इस लूट को रोका जाना सबसे जरुरी है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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