आइजोल, 04 अप्रैल (जा)। भारत के पूर्वाेत्तर में बसा छोटा सा राज्य मिजोरम अपनी नैसर्गिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। मिजोरम की राजधानी आइजोल तो जैसे बादलों की गोद में बसी एक शांत दुनिया है, जहां हर मोड़ पर प्रकृति मुस्कुराती हुई नजर आती है। मिजोरम की यात्रा प्रकृति, संस्कृति और सादगी से जुड़ने का अवसर है। आइजोल शहर में घूमने का अनुभव भी अनोखा है। शहर घूमते समय आप किसी भी वाहन का हॉर्न नहीं सुनेंगे। सड़क पर वाहन एकदम अनुशासित तरीके से चलते मिलेंगे। हर कोई आपसे मुस्कुरा कर बात करेगा। दुकान, होटल, रेहड़ी सब जगह महिलाएं काम करती दिखेंगी। सोलोमन टैंपल की शांति, स्काईवॉक का रोमांच और कहानियां सुनाती रैक की पहाड़ियां दिल को छू लेती हैं। भीड़-भाड़ से दूर, सुकून भरे किसी स्थान पर घूमने की तलाश में हैं तो मिजोरम की यह खूबसूरत राजधानी आपका इंतजार कर रही है।

आइजोल : साइलेंट सिटी की सादगी
आइजोल को साइलेंट सिटी कहा जाता है। यहां का अनुशासन, साफ-सफाई और लोगों की सादगी इसे देश के अन्य शहरों से अलग बनाती है। सड़कें व्यवस्थित हैं। लोगों को विनम्र स्वभाव बहुत अच्छा अहसास करवाता है। यहां आपको हर घर के बाहर गमलों में फूल खिले दिखेंगे। यह शहर घूमने तक समिति नहीं रहता, बल्कि यहां की खूबसूरती और सुकून दिल में बस जाते हैं।
आइजोल जाने के लिए हवाई जहाज से लेंगपुई तक जाया जा सकता है। यहां से आइजोल शहर की दूरी 32 किलोमीटर है। लेंगपुई एयरपोर्ट से आपको राजधानी के लिए आसानी से टैक्सी मिल जाती है। दूसरा विकल्प ट्रेन है। सायरांग रेलवे स्टेशन अब दिल्ली से जुड़ गया है। दिल्ली से सीधे राजधानी अब सायरांग तक जाती है। इसके अलावा कोलकाता और असम से भी ट्रेन के माध्यम से सायरांग पहुंचा जा सकता है। सायरांग से आइजोल केवल 20 किलोमीटर है।
रैक : प्रकृति के रंगों में रंग जाते हैं पहाड़
रैक पहाड़ियां मिजोरम के सबसे लोकप्रिय और खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है। यह स्थान राजधानी आइजोल से करीब 30 किलोमीटर दूर है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 1,400 से 1,500 मीटर है। यहां का दृश्य इतना मनमोहक है कि इसकी चोटी से आप चारों ओर दूर-दूर तक सभी पहाड़ों को 360 डिग्री घूम कर देख सकते हैं।
रैक की पहाड़ियां घने जंगल और बादलों से ढकी रहती हैं। सूर्याेदय और सूर्यास्त के समय प्रकृति इन पहाड़ों को अपने रंग में रंग देती है। यहां पहुंचते ही मन प्रकृति के साथ एकाकार हो जाता है।
यह जगह ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए भी कम खास नहीं है। यहां की पारंपरिक मिजो झोपड़ियां और लोक संस्कृति इस यात्रा को और भी खूबसूरत बना देती हैं। आइजोल से टैक्सी लेकर यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

स्काईवॉक : आसमान के करीब एक रोमांच
आइजोल स्काइवॉक पर जाना बहुत रोमांचक है। जब भी आइजोल जाएं तो इस रोमांच का अनुभव जरूर करें। कांच और स्टील से बना यह स्काईवॉक पहाड़ियों के ऊपर बना है। यहां खड़े होकर नीचे देखने का अनुभव अलग अहसास करवाता है।
यहां से पहाड़ों पर बसे आइजोल शहर की खूबसूरती को निहारा जा सकता है। रात के समय यहां से शहर को देखना अद्भुत है। दूर तक फैले घर और बादलों का खेल दिल में बस जाता है। स्काईवॉक आइजोल शहर के साथ लगती पहाड़ी पर है। यहां टैक्सी लेकर आसानी से पहुंचा जा सकता है।
सोलोमन टेंपल रू आस्था और स्थापत्य का संगम
आइजोल की घुमावदार सड़कों से गुजरते हुए जब सोलोमन टेंपल (चर्च) की पहली झलक मिलती है, तो मन ठहर सा जाता है। इसकी अनोखी वास्तुकला और सफेद रंग में नहाया यह विशाल परिसर आपको अपनी ओर खींच लेता है। चारों ओर शांति और अनुशासन एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं।
न कोई शोर, न कोई भाग-दौड़, बस एक गहरा सुकून
यह जगह केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए है। यहां आप खुद से जुड़ पाते हैं। इस चर्च का निर्माण एलबी सैलो ने करवाया था। बताते हैं कि उन्हें एक रात दिव्य स्वप्न आया, जिसके बाद इसका निर्माण शुरू किया गया। वर्ष 2017 में इसे लोगों के लिए खोला गया। यहां एक समय में दो हजार लोग प्रार्थना कर सकते हैं। यह आइजोल में ही स्थित है।

