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    Home»चुनाव»उत्तराखंड में हरीश रावत गुट ने की खुली बगावत
    चुनाव

    उत्तराखंड में हरीश रावत गुट ने की खुली बगावत

    adminBy adminApril 3, 2026No Comments3 Views
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    देहरादून, 03 अप्रैल (ए)। पूर्व सीएम हरीश रावत समर्थक रामनगर के संजय नेगी को पार्टी ज्वाइन न कराने से कांग्रेस में सुलगा असंतोष अब खुली बगावत के रूप में सामने आ गया है।
    गत दिवस जहां हरीश रावत कैंप के धारचूला विधायक हरीश धामी और पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रदेश नेतृत्व पर भी सवाल उठा दिए। धामी ने रावत समर्थकों से सामुहिक इस्तीफे देने की अपील तक कर दी है। वहीं, इस प्रकरण पिछले कुछ दिनों से खामोश पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने भी रावत कैंप पर करारा पलटवार किया है। चुनावी साल में पार्टी नेताओं के बीच बढ़ते वॉकयुद्ध ने कांग्रेस के लिए मुश्किलों में और भी ज्यादा इजाफा कर दिया है। पिछले महीने 28 मार्च को दिल्ली में तीन पूर्व विधायक समेत छह लोगों की कांग्रेस में ज्वाइनिंग के बाद से ही कांग्रेस में घमासान के हालात है। रावत संजय नेगी को भी शामिल कराना चाहते थे।
    उत्तराखंड कांग्रेस में एकजुटता की बातें अक्सर होती हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और ही दिखती हैं। ताज़ा विवाद रामनगर से जुड़ा है। रामनगर के जाने-माने जमीनी नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी की कांग्रेस में ज्वाइनिंग को लेकर पार्टी के भीतर ही इतना विरोध उठ खड़ा हुआ कि मामला हाईकमान तक जा पहुंचा। नतीजा यह रहा कि संजय नेगी उस जॉइनिंग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए जिसमें बीजेपी के छह पूर्व नेता कांग्रेस में आए।
    इस पूरे घटनाक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने 15 दिन का राजनीतिक अवकाश लेने की घोषणा कर दी और जॉइनिंग कार्यक्रम में खुद भी नहीं पहुंचे। उनकी यह अनुपस्थिति महज संयोग नहीं थी। यह कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी का खुला इजहार है।
    रामनगर की राजनीति में संजय नेगी कोई नया नाम नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रामनगर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। राजनीति में उनकी जड़ें छात्र जीवन से ही जुड़ी हैं। एनएसयूआई से चुनाव लड़ चुके हैं और रामनगर क्षेत्र में ब्लॉक प्रमुख के पद पर भी रह चुके हैं।
    2022 में जब कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे पार्टी से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतर गए थे। उस वक्त भी यह सवाल उठा था कि कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति ने एक मज़बूत स्थानीय नेता को पार्टी से बाहर धकेल दिया।
    संजय नेगी सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहे। रामनगर क्षेत्र में बाघ के आतंक से परेशान ग्रामीणों के लिए उन्होंने आत्मदाह की चेतावनी तक दे डाली थी, जिससे वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया था। यह बताता है कि वे महज राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, इस इलाके के सक्रिय जनप्रतिनिधि की भूमिका में रहे हैं।
    हरीश रावत की रामनगर में हुई पदयात्राओं में भी संजय नेगी की भूमिका अहम रही है। वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने की मांग को लेकर रावत की पदयात्रा में ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख के रूप में संजय नेगी शामिल रहे थे। यही वजह है कि रावत उन्हें कांग्रेस में लाने के लिए इतने उत्सुक थे।

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