नई दिल्ली, 31 मार्च (जा)। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी और हिरासत पर गत दिवस नवगठित बालेंद्र शाह सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हालांकि, ओली की गिरफ्तारी के बाद हिमालयी देश में तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहे, जबकि अधिकारियों ने मनी लॉड्रिंग के मामले में तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल के खिलाफ जांच को तेज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश ओली की पत्नी राधिका शाक्य द्वारा दायर हैबियस कार्पस याचिका के जवाब में जारी किया, जिसमें उनके तत्काल रिहाई की मांग की गई थी। हालांकि, जस्टिस मेघराज पोखरेल की एकल पीठ ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। ओली को 28 मार्च को पिछले वर्ष 8 और 9 सितंबर को जेन जी के विरोध प्रदर्शन के हिंसक दमन में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया, जिसमें 76 लोगों की मौत हुई थी।
गिरफ्तारियां तब हुईं जब नवगठित बालेंद्र शाह सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जेन जी विरोधों की जांच आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लिया।
राधिका शाक्य ने याचिका में दावा किया कि उनके पति को अवैध हिरासत में रखा गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता तिकराम भट्टाराई ने तर्क किया कि केपी शर्मा ओली को गिरफ्तारी वारंट जारी करके तत्काल गिरफ्तार करना असंवैधानिक है।
गौरी बहादुर कार्की जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किसी को चयनात्मक रूप से गिरफ्तार करना अवैध है। सरकार ने आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है।
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