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    Home»देश»लिव-इन रिलेशनशिप माने जाएंगे विवाहित, जनगणना 2027 में हुआ बदलाव
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    लिव-इन रिलेशनशिप माने जाएंगे विवाहित, जनगणना 2027 में हुआ बदलाव

    adminBy adminMarch 31, 2026No Comments4 Views
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    नई दिल्ली 31 मार्च। भारत में जनगणना के दौरान स्व- गणना का विकल्प चुनने वालों के लिए पोर्टल खोल दिया गया है। पोर्टल पर दिए गए अकसर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू)में कहा गया कि अगर लिव-इन संबंध में रहने वाले दो लोग एक-दूसरे को हमेशा के लिए अपना मानते हैं तो उन्हें जनगणना के दौरान वैवाहिक दंपत्ति के समान माना जाए।

    भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायणन ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि जनगणना दो चरणों में होगी। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर के बीच मकानों की गणना होगी। दूसरा चरण नागरिकों की गणना होगी जो मार्च 2027 से शुरू होगा। उन्होंने बताया कि देश के हर भवन के लिए यूनीक आईडी और सटीक मैपिंग के लिए जियो टैगिंग होगी। यह पोर्टल जनगणना के दोनों चरणों ‘हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ (एलएलओ) और जनसंख्या गणना के लिए उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची दी गई है ताकि लोग देश की 16वीं जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले सवालों का आसानी से उत्तर दे सकें। इन एफएक्यू में पूछा गया कि क्या लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़े को विवाहित जोड़ा माना जाएगा? जवाब में पोर्टल पर कहा गया कि यदि वे हमेशा के लिए एक-दूसरे को अपना मानते हैं, तो उन्हें विवाहित जोड़े के रूप में माना जाए।

    किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं
    जनगणना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। आयुक्त ने यह भी बताया कि डाटा मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र किया जाएगा, और एक वेब पोर्टल जनगणना और हाउस लिस्टिंग की विभिन्न गतिविधियों की निगरानी व प्रबंधन करेगा।

    जनगणना का एसआईआर से कोई संबंध नहीं
    जनगणना आयुक्त ने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के अपडेट को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसका चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण से कोई संबंध नहीं है

    डिजिटल गणना से आसानी
    पहले डाटा कागज पर एकत्र किए जाते थे, जिससे डिजिटलीकरण में काफी समय लगता था। अब शुरुआत से ही डिजिटल डाटा मिलेगा, इसलिए हम बहुत जल्दी डाटा जारी कर सकेंगे। कई डाटा सेट 2027 में ही प्रकाशित किए जाएंगे। नारायण ने कहा कि यह सुविधा केवल देश में रहने वाले लोगों के लिए उपलब्ध होगी, विदेश में रहने वालों के लिए नहीं।

    जाति को जनगणना में शामिल करने और लोगों द्वारा सही जानकारी नहीं दिए जाने की आशंका के बारे में पूछे जाने पर महापंजीयक ने कहा कि जाति से संबंधित डाटा दूसरे चरण में एकत्र किया जाएगा और इसके प्रश्न व्यापक चर्चा के बाद तय किए जाएंगे।

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