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    Home»देश»पराक्रम की प्रतीक पूजनीय मातृशक्ति को समय आ गया है बराबरी का अधिकार मिलने का
    देश

    पराक्रम की प्रतीक पूजनीय मातृशक्ति को समय आ गया है बराबरी का अधिकार मिलने का

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMarch 25, 2026No Comments6 Views
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    लगता है कि महिलाओं को हर क्षेत्र में संख्या के हिसाब से भागीदारी का समय आता जा रहा है। आजकल जो इस बारे में खबरें मिल रही हैं उनसे लगता है कि पुरुष प्रभावी समाज में अब विचारों में मंथन होने लगा है कि जब मातृशक्ति हर क्षेत्र में सफल है तो उसे बराबर का अधिकार क्यों ना मिले। एक खबर मिली की संसद में महिलाओं की इतनीसीटें होंगी तो बीते दिवस कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संसद भवन कार्यालय में महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की रुपरेखा के लिए सरकार से विचार के लिए सर्वदलीय बैठक पर जोर दिया गया। इस बारे में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह भी किया गया। दूसरी तरफ सेना में भी अब महिला अफसरों को भी स्थायी कमीशन मिलेगा और जिनकी सेवा पहले खत्म हो चुकी है उन्हें भी इस हिसाब से पेंशन मिलेंगी। यह बिंदु और समाचार पढ़कर ऐसा लगता है कि जल्द ही पुरुषों की बराबरी में खड़े होकर देश और समाज के उत्थान में अपनी कामयाबी का परचम फहरा सकती है नारी शक्ति।
    ध्यान से सोचे तो इस काम में बहुत देर की गई है। यह तो कई दशक पहले हो जाना चाहिए था। क्योंकि हर परिस्थिति में परिवार को बांधे रखने के साथ ही सभी की जरुरतों को पूरा कर तालमेल बनाने में सफल महिलाएं किसी मैनेजमेंट कॉलेज में डिग्री प्राप्त लोगों से भी अच्छा मैनेजमेंट करने में सफल हैं। कहते हैं कि परिवार की गाड़ी के महिला पुरुष दो पहिये हैं। अगर तालमेल बना रहेगा तो सबकुछ ठीक चलेगा। दूसरी तरफ नारी शक्ति के पराक्रम और मान प्रतिष्ठा की कहानी इतिहास में दर्ज है। रानी लक्ष्मीबाई अहिल्या बाई के बारे में आज भी स्कूलों में पढ़ाया जाता है। वर्तमान में हम नवरात्रि मना रहे हैं जिसमें नौ देवियों की पूजा हो रही है। महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने की मुहिम समाज और देशहित में जल्द पूरी की जाए और मातृशक्ति को मजबूत बनाने के लिए उन्हें युद्ध कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जाए। वैसे तो महिलाएं आज खुद ही सतर्क हैं। अष्टमी नवमी और दशमी मनाने जा रहे हैं। इसलिए अगर मातृशक्ति को नमन करनेे की शुरुआत ऐसे समय में की जाए तो ज्यादा अच्छा है। दुनिया में जितनी महिला राष्टाध्यक्ष रही उनकी कार्यनीति और सोच के किस्से हम आज भी सुनते सुनाते हैं तो सब मिलकर महिलाओं के सम्मान के लिए प्रयास शुरू करें।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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