नई दिल्ली 23 मार्च। जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की संख्या और अमानवीय स्थितियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 18 मई तक जेलों से जुड़ी अपडेटेड जानकारी देने का निर्देश दिया है। इस जानकारी में हर जेल की स्वीकृत क्षमता और भीड़भाड़ को रोकने के लिए उठाए गए कदम शामिल होंगे।
दरअसल, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उनके अधिकार क्षेत्र में मौजूद महिला जेलों की संख्या और उनमें उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी जानकारी मांगी है। इसमें महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों की शिक्षा और उनके समग्र कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम भी शामिल हैं।
सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल, जो जेलों में अमानवीय स्थितियों से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले में ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत के सहायक) के तौर पर शीर्ष अदालत की मदद कर रहे हैं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान इस तथ्य की ओर दिलाया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए आंकड़े 2023 के हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें शामिल मुद्दों की प्रकृति और एक सूचित न्यायिक प्रक्रिया की आवश्यकता को देखते हुए, कार्यवाही पर प्रभावी ढंग से विचार करने के लिए अपडेटेड और समकालीन डेटा की उपलब्धता अनिवार्य है।
बेंच ने 17 मार्च को पारित अपने आदेश में कहा, ” हम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश देना उचित समझते हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्थित सभी जेलों से संबंधित अपडेटेड और व्यापक आंकड़े रिकॉर्ड पर रखें।”
सुप्रीम कोर्ट ने क्या क्या दिया निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश में कहा गया है कि डेटा में हर जेल की क्षमता, कैदियों की कुल संख्या, हर जेल में भीड़भाड़ का प्रतिशत, भीड़भाड़ की समस्या से निपटने के लिए प्रस्तावित कदम, महिला जेलों का विवरण, महिला कैदियों और उनके साथ रहने वाले बच्चों को दी जाने वाली सुविधाएं (शैक्षिक और चिकित्सा सुविधाओं सहित), जेल कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या, मौजूदा रिक्तियां, उन्हें भरने के लिए उठाए गए कदम, और जेल प्रशासन से जुड़े अन्य सभी सहायक पहलू शामिल होने चाहिए।
1 मार्च, 2026 तक के आकड़ें उपलब्ध कराएं
बेंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे हर जेल की स्वीकृत क्षमता और 1 मार्च, 2026 तक जेलों में बंद कैदियों की कुल संख्या को दर्शाने वाला पूरा विवरण प्रस्तुत करें, साथ ही जेल-वार विवरण भी दें, जिससे जेलों में कैदियों की संख्या (ऑक्यूपेंसी) का पता चल सके।
26 मई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 18 मई तक विस्तृत हलफनामे दाखिल करेंगे, जिन पर गृह सचिव की विधिवत शपथ होगी और जिनमें ज़रूरी विवरण दिए जाएंगे। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 26 मई की तारीख तय की है।

