देश दुनिया में बेरोजगारी खत्म करने और शिक्षित युवाओं सहित निरक्षरों बेरोजगारों को काम देने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरु की है और बनाई जा रही हैं। केंद्र व प्रदेशों के मंत्री व अफसर इस बारे में दावे भी खूब कर रहे हैं। आने वाले वित्तीय वर्ष में लाखों युवाओं को रोजगार देने की योजना भी बताई जाती है। लेकिन जब तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को सेवा विस्तार या अन्य स्थानों पर नौकरी करने की सुविधा मिलती रहेंगी मुझे नहीं लगता कि सरकार का यह सपना पूरा हो पाएगा।
वैसे भी हर रिटायर व्यक्ति को चाहे वह चतुर्थ श्रेणी का रहा हो या उच्च स्तर उसे पेंशन व सुविधाएं सरकारों द्वारा दी जा रही हैं। यह सब इसलिए है कि अवकाश के बाद यह लोग अपने परिवारों का खर्चा उठा सकें और खुशहाल जिंदगी जिएं। मगर देखने में आ रहा है कि अच्छी मोटी पेंशन मिलने के बाद भी डॉक्टर कर्मचारी व ज्यादातर अफसर उन स्थानों पर नौकरी करने लगते हैं जो युवाओं को मिले तो उनका जीवन यापन सही प्रकार से हो सकता है और बेरोजगारी भी खत्म होगी। डॉक्टरों को ही ले तो एक उम्र के बाद पेंशन और अन्य सुविधाओं के साथ उन्हें रिटायरमेंट दिया जाता है। क्योंकि औरों को भी मौका मिले और नागरिक सुविधाओं का लाभ उठा सकें। होना यह चाहिए कि ६० या उसके आसपास की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारी एनजीओ के साथ जुडकर सेवा भाव से काम करें। इनकी सेवा से समाज का भला होगा और जिन पदों पर यह कब्जा करते हैं उन पर नौजवानों को मौका मिलेगा। देखने में आ रहा है कि ज्यादातर अफसर रिटायर हो जाते हैं वो जनसामान्य से संबंध क्षेत्रों में नौकरी करने लगते हैं लेकिन अफसरशाही की अकड़ और अहम की संतुष्टि का चस्का उन्हें लगता है वो पूरा न होने पर वो ग्राहकों मरीजों व डॉक्टरों से दुर्व्यवहार करने के साथ साथ अपनी अफसरी के जमाने का रौब झाड़ना शुरु कर देते हैं। इससे हो यह रहा है कि नौजवानों को नौकरी नहीं मिल पा रही है और आम आदमी की यह सेवानिवृत अफसर बेइज्जती करते हैं। सेवा भाव से संचालित एक एनजीओ को मैं जानता हूं। उसमें चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए रखे गए रिटायर अफसर एनजीओ से तो तनख्वाह ५० हजार से १ लाख तक लेते हैं उन्हें अपने घर का पता बताने के साथ देखने और इलाज के लिए अतिरिक्त पैसा लेते हैं। एक हडिडयों का डॉक्टर तो एनजीओ के चिकित्सालय में ही बैठकर इंजेक्शन लगाने के १५०० रुपये तक लेता है। आंखों का डॉक्टर खुद को सीनियर सर्जन बताकर मरीजों से दुव्यर्वहार करता है। कुल मिलाकर यह तो अपने अहम और अफसरशाही की संतुष्टि के साथ माल भी कमा रहे हैं और आम आदमी से दुर्व्यवहार करने के साथ नौजवानों के अधिकार पर कुठाराघात भी कर रहे हैं। सरकार को देखना चाहिए कि चिकित्सा को घर घर तक पहुंचाने के लिए वो एनजीओ के अस्पताल आदि में सरकारी चिकित्सकों की नियुक्ति करे और नए डॉक्टरों से यह भी अनुबंध करे कि पांच साल तक किसी एनजीओ या देहात में कम वेतन पर सेवा भाव से काम करना होगा तभी एनजीओ की सोच पूरी होगी। नौजवानों को रोजगार मिलेगा और आम आदमी इन सेवानिवृत अफसरों की सनक का शिकार होने से बचेगा। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए रिटायर अफसरों की दूसरी नौकरी करने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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